रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

13 अगस्त 2026, जगदलपुर (बस्तर)। जनपद पंचायत दरभा क्षेत्र में गौण खनिज राजस्व के वितरण और विकास कार्यों के आवंटन में कथित अनियमितता का मामला गरमाता जा रहा है। कलेक्टर कार्यालय में पहले की गई शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से नाराज जनपद सदस्यों ने अब संभागायुक्त (बस्तर संभाग) के समक्ष मोर्चा खोलते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की लिखित मांग की है।

₹2 करोड़ के आवंटन में पारदर्शिता और नियमों की अनदेखी का आरोप

मामला जनपद पंचायत दरभा अंतर्गत अधोसंरचना निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत लगभग ₹2,00,00,000/- (दो करोड़ रुपये) की राशि के वितरण से जुड़ा है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि गौण खनिज राजस्व से प्राप्त इस राशि की कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करने और आवंटन की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं:

जनप्रतिनिधियों और पंचायतों की उपेक्षा: कार्ययोजना बनाते समय स्थानीय पंचायतों और चुने हुए जनप्रतिनिधियों से आवश्यक विचार-विमर्श या परामर्श नहीं किया गया।
आवंटन में असमानता: उपलब्ध वित्तीय राशि के वितरण में भारी असमानता बरती गई है, जिससे पंचायतों के विकास हितों को ठेस पहुंची है।


प्रक्रियात्मक पारदर्शिता का अभाव: प्रशासकीय व तकनीकी स्वीकृतियों और संबंधित अभिलेखों के रख-रखाव में नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है।

कलेक्टर को पूर्व में सौंपी गई थी शिकायत, कार्रवाई न होने से बढ़ा असंतोष

ज्ञात हो कि इस संदर्भ में पत्र क्रमांक 1678/उ.स.प./गौण खनिज/जगदलपुर (दिनांक 11.06.2026) के तहत बस्तर कलेक्टर को पहले भी लिखित शिकायत सौंपी जा चुकी है। हालांकि, लंबे समय बाद भी शिकायत पर कोई संतोषजनक जांच या ठोस कार्रवाई न होने पर जनप्रतिनिधियों ने संभागायुक्त के समक्ष प्रकरण को पुनः संज्ञान में लेने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है।

दरभा जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों— कंचन कश्यप,  कमलू कवासी, बलिराम बघेल,  दिव्या पोयम, एवं राजू सोढ़ी—ने संयुक्त रूप से मांग की है कि

1. कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक हो: कलेक्टर कार्यालय द्वारा पुरानी शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई और जांच प्रतिवेदन की समीक्षा संभागायुक्त स्तर पर की जाए।
2. समग्र अभिलेखों की जांच: गौण खनिज राजस्व की स्वीकृति, आवंटन, कार्ययोजना और प्रशासकीय-तकनीकी स्वीकृतियों के समस्त रिकॉर्ड खंगाले जाएं।
3. जवाबदेही तय हो: वित्तीय या प्रक्रियात्मक अनियमितता पाए जाने पर दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों व जिम्मेदारों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
4. लिखित सूचना: प्रकरण में की गई संपूर्ण जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का लिखित विवरण शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए।
जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि चूंकि यह राशि सार्वजनिक धनराशि और ग्रामीण अंचलों के सीधे विकास से जुड़ी है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच होना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।

नोट – यह खबर ज्ञापन एवं बयानों के आधार पर प्रेषित किया गया है, अधिकारियों के बयान के बाद एक खबर और प्रेषित किया जाएगा।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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