रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

बीजापुर, 25 अगस्त 2026। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर बीजापुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम संगमपल्ली में संचालित भगवती स्व-सहायता समूह से जुड़ी 10 महिलाएं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लंबे समय तक भय और चुनौतियों के बीच जीवन बिताने वाली इन महिलाओं के लिए अब नक्सलमुक्त वातावरण नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का अवसर लेकर आया है।

समूह की सदस्य नेहा टिन्गे ने बताया कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को अपनी प्रतिभा और हुनर को आजीविका से जोड़ने का अवसर मिला है। रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए समूह की महिलाओं ने धान और चावल से आकर्षक एवं पारंपरिक राखियां तैयार की हैं। इन राखियों को जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों में स्टॉल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। लोगों द्वारा इन राखियों को काफी पसंद किया जा रहा है, जिससे महिलाओं का उत्साह बढ़ा है और उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य भी मिल रहा है।
नेहा ने बताया कि समूह से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ आत्मविश्वास से भी आगे बढ़ रही हैं। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कला को आजीविका का साधन बनाकर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहने के दौरान लोगों के मन में हमेशा डर बना रहता था। आने-जाने में भी कई तरह की परेशानियां और असुरक्षा महसूस होती थी। लेकिन आज गांव और जिला नक्सलमुक्त होने के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हुई है। अब लोग बिना किसी भय के अपने जरूरी कामों के लिए कहीं भी आ-जा सकते हैं। नक्सलमुक्त वातावरण ने ग्रामीण महिलाओं को भी अपने घर-परिवार के साथ आगे बढ़ने और स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने का हौसला दिया है।
नेहा टिन्गे ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से मिल रहे सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है और वे अपने हुनर को आय का साधन बना रही हैं।
भगवती समूह की महिलाओं की यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि नक्सलमुक्त बीजापुर में बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब भय से नहीं बल्कि आत्मविश्वास और स्वावलंबन के साथ अपने भविष्य की नई राह तैयार कर रही हैं।