रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

स्व-सहायता समूह से जुड़ाव, प्रशिक्षण और ऋण ने बदली राह, अब मुर्गी पालन बना स्थायी आजीविका का आधार
बीजापुर, 25 अगस्त 2026/ मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ अवसरों का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं। इसका प्रेरक उदाहरण विकासखण्ड बीजापुर के ग्राम बोरजे निवासी श्रीमती मंजू मड़े हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर मुर्गी पालन को अपनी स्थायी आजीविका का आधार बनाया है।

स्व-सहायता समूह ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह
वर्ष 2017 में मंजू मड़े ओम साई स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्होंने नियमित बचत, वित्तीय अनुशासन और स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। समूह से मिली सीख और आत्मविश्वास ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद वर्ष 2025 में वे एकीकृत फार्मिंग क्लस्टर से जुड़ीं और मुर्गी पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया। व्यवसाय को शुरू करने के लिए उन्होंने ₹60 हजार का ऋण प्राप्त किया और प्रारंभिक चरण में 400 चूजों का पालन शुरू किया।

400 चूजों से शुरू हुआ सफर, अब बिक्री ₹500 प्रति मुर्गी तक
मंजू ने बेहतर प्रबंधन और मेहनत के साथ मुर्गियों का पालन किया। लगभग 21 दिनों के पालन-पोषण के बाद उन्होंने 169 चूजों को ₹70 प्रति चूजा की दर से बेचकर ₹11,830 की आय अर्जित की। शेष मुर्गियों को उन्होंने आगे पालन के लिए रखा, जिससे व्यवसाय को धीरे-धीरे विस्तार मिलता गया।
आज मंजू द्वारा तैयार मुर्गियों की बिक्री लगभग ₹500 प्रति मुर्गी की दर से हो रही है। अब तक वे करीब ₹85 हजार का विक्रय कर चुकी हैं। मुर्गी पालन से प्राप्त आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ मंजू को अपनी आजीविका के लिए आत्मनिर्भर बनाया है।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मंजू मड़े की सफलता यह साबित करती है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ाव, नियमित बचत, प्रशिक्षण, ऋण का उचित उपयोग और निरंतर मेहनत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सफलता से न केवल परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है, बल्कि गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
मंजू मड़े की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत बड़े साधनों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों, अनुशासन और सही अवसर के सदुपयोग से होती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला मंच और स्व-सहायता समूह का साथ उनके सपनों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।