रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

‘कलागुड़ी बस्तर आर्ट्स’ ब्रांड से संवरेगी स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका

जगदलपुर, 9 सितम्बर 2026/ बस्तर की विश्वविख्यात हस्तशिल्प कला को संरक्षित करने और इससे जुड़े स्थानीय कारीगरों की आजीविका को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुधवार को जिला पंचायत बस्तर के सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला एवं बैठक आयोजित की गई। स्वदेशी शिल्पकला पुनरूद्धार परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस बैठक में बस्तर के विभिन्न अंचलों से आए शिल्पकार परिवारों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ‘बस्तर आर्ट्स’ परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव रहा, जिसे 10-सूत्रीय कार्ययोजना के साथ पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य ध्येय क्षमता निर्माण, आधुनिक बाजार विकास और डिजिटल सशक्तिकरण के जरिए पारंपरिक ढोकरा, लौह शिल्प, काष्ठ कला, टेराकोटा, बांस, कौड़ी शिल्प, सीसल कला और आदिवासी वेशभूषा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर ‘कलागुड़ी बस्तर आर्ट्स’ ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।


प्रस्तुतीकरण के उपरांत आयोजित खुले संवाद सत्र में कारीगरों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं, कच्चे माल की सुलभता और उन्नत उपकरणों की आवश्यकता पर खुलकर विचार रखे। शिल्पकारों के इन्हीं सुझावों को आधार बनाकर एक ठोस एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत क्लस्टर स्तर पर रॉ मटेरियल बैंक स्थापित किए जाएंगे ताकि कारीगरों को आसानी से कच्चा माल मिल सके, वहीं भारतीय शिल्प एवं डिजाइन संस्थान (आईआईसीडी) जैसे शीर्ष संस्थानों के मास्टर ट्रेनर्स द्वारा आधुनिक डिजाइन और कौशल उन्नयन के लिए विशेष कार्यशालाएं संचालित की जाएंगी। इसके साथ ही उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए रोटेशनल वर्किंग कैपिटल फंड की व्यवस्था और उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने हेतु ‘बस्तर ट्रेसकोड’ की तकनीक लागू की जाएगी।
परियोजना के तहत एक विशेष लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवं बिक्री केंद्र भी विकसित किया जाएगा, जहाँ आने वाले पर्यटक और शोधार्थी शिल्पकारों को अपनी आँखों के सामने कलाकृतियों का निर्माण करते देख सकेंगे और बिचौलियों के बिना सीधे प्रामाणिक हस्तशिल्प खरीद सकेंगे। प्रशिक्षित गाइड्स के माध्यम से इस केंद्र को एक सांस्कृतिक व शैक्षणिक पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरी पहल का अंतिम लक्ष्य बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर शिल्पकारों की आय में दो से तीन गुना तक सीधी बढ़ोतरी करना है। बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला व ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक, नीति आयोग के पीपीआई फेलो, ट्राईफेड के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य और स्थानीय कलाकार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्थानीय समुदाय और प्रशासन के इस साझा प्रयास से बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊँचाई मिलने की प्रबल उम्मीद है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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