रिपोर्ट – दीपक पांडे

तीन माह से मजदूरी नहीं मिलने का आरोप, निर्माण में सरिया के इस्तेमाल को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
10 सितम्बर 2026, बकावंड। विकासखंड के ग्राम पंचायत बकावंड में जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 1 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से बकावंड तालाब का जीर्णोद्धार एवं सीसी लाइनिंग निर्माण कराया जा रहा है तालाब के साथ दो केनाल का निर्माण भी किया गया है निर्माण कार्य को लेकर जहां एक ओर मजदूरों ने करीब तीन माह से मजदूरी भुगतान लंबित होने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के मुताबिक उन्होंने करीब दो लाख रुपये का काम किया है, लेकिन लंबे समय से मेहनताना नहीं मिल पाया है। मजदूरों का कहना है कि कड़ी धूप में मेहनत करने के बावजूद भुगतान अटकने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं। मजदूरों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।
इधर, निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों और मजदूरों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन हिस्सों में सरिया का इस्तेमाल किया जाना था, वहां कुछ स्थानों पर कथित रूप से सरिया लगाए बिना ही सीमेंट, रेत और गिट्टी से निर्माण किया गया है। इससे निर्माण की मजबूती और गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
मजदूरों एवं ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए तथा निर्माण में निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी जांच की जाए। साथ ही मजदूरों की लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान कराने की मांग की गई है।
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई : विधायक लखेश्वर बघेल
इस मामले को लेकर बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है तो ऐसे लापरवाह ठेकेदार एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों एवं ग्रामीणों देवली, समवती, यशोदा, रीना विश्वनाथन, विसु, कमलु, धनुर, दिनेश, अकेंद्रे, बोड़गु फरसुराम, मुनालाल, देवी, बब्लू, सुधीर, रीना, पार्वती, बालमती, विमला, धनेश्वरी और मनिषा सहित अन्य लोगों ने भी लंबित मजदूरी भुगतान और निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग की है।
अब देखना होगा कि जल संसाधन विभाग इन आरोपों को लेकर कब तक तकनीकी जांच कराता है और मजदूरों को उनकी मेहनत की राशि का भुगतान कब तक किया जाता है। साथ ही जांच के बाद यदि निर्माण में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।