
संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा
जगदलपुर, 30 सितंबर 2026/ बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफ़ान ‘अर्नब’ के असर से 23 से 26 सितंबर के दौरान बस्तर अंचल में हुई मूसलाधार बारिश और पड़ोसी राज्य ओडिशा के खातीगुड़ा व मुरान बांध के फाटक खोले जाने के कारण क्षेत्र में भीषण बाढ़ और गंभीर जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई थी। लगातार हो रहे जलभराव से कई गांवों का संपर्क टूट गया था और सामान्य गतिविधियां पूरी तरह थम गई थीं।
हालांकि, अब नदियों और नालों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने से हालात सामान्य होने लगे हैं और प्रभावित ग्रामीण अपने रोजमर्रा के जीवन को फिर से संवारने में जुट गए हैं।बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही अब प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पानी के ठहराव और गंदगी के कारण प्रभावित बस्तियों में जलजनित रोगों, संक्रामक बुखार और मौसमी बीमारियों के फैलने की आशंका काफी बढ़ गई है, जबकि कई इलाकों में कच्चे मकानों और ढांचों को भी क्षति पहुंची है। इस स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है।
विभाग द्वारा प्रभावित गांवों और मोहल्लों में विशेष चिकित्सा दल भेजे जा रहे हैं, जो मौके पर ही स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कर रहे हैं। इन शिविरों में स्वास्थ्य कर्मी ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाइयां, प्राथमिक उपचार सामग्री और ओआरएस के पैकेट उपलब्ध करा रहे हैं।
इसके साथ ही मेडिकल टीमें ग्रामीणों को दूषित पानी से होने वाले खतरों से आगाह करते हुए पानी उबालकर पीने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की समझाइश भी दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित सक्रियता से बाढ़ प्रभावितों को अपने ही गांव में फौरी चिकित्सीय सहायता मिल रही है, जिससे क्षेत्र में स्थिति तेजी से नियंत्रण में आ रही है।