जगदलपुर, 10 अक्टूबर 2026/ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की भव्यता सिर्फ उसके विशालकाय रथ और रस्मों के साथ उस जन-भागीदारी में भी बसती है जो पर्दे के पीछे रहकर इस पर्व को जीवंत बनाती है। इसी परंपरा और समर्पण को नमन करते हुए सिरहासार भवन में एक बेहद भावुक और आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जहां आस्था और कृतज्ञता एक साथ मुस्कुराते नजर आए। गंगानगर वार्ड की सेवानिवृत्त शिक्षिका मनकुंवर सोनी ने अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर बस्तर दशहरा के विशालकाय रथ का निर्माण करने वाले पारंपरिक शिल्पकारों के लिए सेवा जोहार कार्यक्रम का आयोजन किया।

दिन-रात पसीना बहाकर ऐतिहासिक रथ को आकार देने वाले इन हुनरमंद हाथों के सम्मान में सोनी ने सिरहासार भवन में एक गरिमामय न्यौता भोज आयोजित किया। सोनी ने अपने हाथों से कारीगरों को भोजन परोसा और बताया कि यह भोज किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी अंतरात्मा से उपजी श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा जो हाथ बस्तर की पहचान गढ़ते हैं, उनकी सेवा करना ही सच्ची पूजा है।

कार्यक्रम का समापन और भी भावुक रहा, जब भोजन के उपरांत श्रीमती सोनी और उनके परिजनों ने सभी बढ़ई कारीगरों को सम्मानपूर्वक कंबल भेंट किए। आने वाली ठंड के पहले मिला यह स्नेह और उपहार पाकर कारीगरों के चेहरों पर सुकून और कृतज्ञता की चमक साफ देखी जा सकती थी।

पर्दे के पीछे रहकर बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर को गढ़ने वाले शिल्पकारों के प्रति एक पूर्व शिक्षिका का यह सम्मान स्थानीय लोगों के बीच चर्चा के साथ ही प्रेरणा का मिसाल बना हुआ है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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