
सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन सेवा दे रहीं शक्ति स्वरूपा
जगदलपुर, 13 अक्टूबर 2026/ शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जहां एक ओर पूरा देश मां दुर्गा की नौ शक्तियों की आराधना में लीन है, वहीं कालीपुर की सड़कों पर नारी शक्ति का एक जीवंत और प्रेरक स्वरूप हर दिन देखने को मिल रहा है। कालीपुर की रहने वाली 20 वर्षीय दीपाली मानिकपुरी ने परंपरागत बंदिशों और सामाजिक दायरों को तोड़ते हुए स्वावलंबन का ऐसा रास्ता चुना है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है।
तीन बहनों में सबसे बड़ी दीपाली ने परिवार की परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को बहुत कम उम्र में ही समझ लिया था। दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें आगे की राह तय करनी थी, तो उन्होंने घर बैठने के बजाय अपने पिता के कंधों का बोझ हल्का करने की ठानी। उनके पिता पेशे से एक कार चालक हैं, और परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए दीपाली ने खुद आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। इसी इरादे के साथ उन्होंने इलेक्ट्रिक रिक्शा का हैंडल थामा और सड़कों पर उतर पड़ीं।
जिस शहर और समाज में ऑटो व ई-रिक्शा की ड्राइविंग सीट पर सिर्फ पुरुषों का दबदबा देखा जाता रहा हो, जहां किसी महिला को व्यावसायिक वाहन चलाते देखना आज भी लोगों को अचरज में डाल देता है, वहां दीपाली का यह कदम बेहद साहसिक है। सुबह छह बजे जब शहर की सड़कों पर चहल-पहल शुरू ही होती है, दीपाली का ई-रिक्शा रफ्तार पकड़ लेता है और रात के नौ बजे तक वे बिना थके, पूरी मुस्तैदी के साथ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं। पंद्रह घंटे के इस लंबे और व्यस्त सफर के बावजूद उनके चेहरे पर न तो कोई थकान दिखती है और न ही किसी तरह की झिझक।
सवारी चाहे पुरुष हो या महिला, हर कोई दीपाली के आत्मविश्वास और शालीनता को देखकर सम्मान से भर जाता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर, जहां शक्ति की उपासना की जाती है, दीपाली मानिकपुरी का यह संघर्ष और हौसला यह साबित करता है कि नारी शक्ति केवल मंदिरों में पूजे जाने वाले रूपों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कर्मक्षेत्र में हर उस बेटी के भीतर जागृत है जो अपनी मेहनत से समाज की सोच को बदल रही है।