
ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के पहले फुल रथ परिक्रमा विधान संपन्न,
पुलिस विभाग की हर्ष फायरिंग के साथ शुरू हुई रथ परिक्रमा, सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा और कुमार जयदेव रहे मौजूद।
14 अक्टूबर 2026, जगदलपुर / बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में ऐतिहासिक विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में 13 से 18 अक्टूबर छह दिनों तक चलने वाली महत्वपूर्ण विधान रथ परिक्रमा का रशम पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मां दंतेश्वरी की डोली को परंपरागत मांदर की थाप, मुंडा बाजा और आतिशबाजी के बीच मावली मंदिर एवं जगन्नाथ मंदिर ले जाया गया, जहां पूजा-अर्चना और छत्र पूजन का विधान संपन्न हुआ। इस दौरान माता की डोली को सलामी हर्ष फायरिंग की गई, जिसके साथ रथ परिक्रमा प्रारंभ हुई। इस दौरान सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्त जन उपस्थित रहे।परंपरा के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर से निकली माता की छत्र मावली मंदिर एवं जगन्नाथ मंदिर पहुंची। इस दौरान प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी के नेतृत्व में धार्मिक विधान संपन्न कराए गए। सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव भी माता के छत्र के साथ इस पारंपरिक आयोजन में शामिल हुए।

उनके साथ बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस वर्ष रथ परिक्रमा के दौरान छह फूल रथ प्रतिदिन परिक्रमा का विधान कार्यक्रम निर्धारित है।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस की विशेष व्यवस्थारथ परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस विभाग ने ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है। इसके तहत मंदिर के आसपास के मार्गों पर दोपहर के बाद यातायात प्रतिबंधित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

राष्ट्रपति के प्रस्तावित मुरिया दरबार कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा पर विशेष ध्यानइस वर्ष बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उनके मुरिया दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया है। इसे देखते हुए पुलिस एवं जिला प्रशासन शहर में सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी तैयारियों को प्राथमिकता दे रहा है।मुरिया दरबार बस्तर की रियासत कालीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में यह आयोजन प्रजातांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप पारंपरिक स्वरूप में जारी है। इसमें मांझी मुखिया चालकी और क्षेत्र के परगना के लोग अपनी समस्याएं, मांगें और क्षेत्र से जुड़े विषय शासन के समक्ष रखते हैं। इस परंपरा के माध्यम से जनजातीय समाज अपनी बात शासन तक पहुंचाने और समस्याओं के निराकरण की अपेक्षा करता है।

माता की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य : कुमार जयदेवकुमार जयदेव ने कहा कि मां दंतेश्वरी की सेवा और श्रद्धालुओं की सेवा से बढ़कर उनके लिए कोई दूसरा कार्य नहीं है। माता ने उन्हें इस योग्य बनाया है कि वे भक्तों और परंपराओं से जुड़े लोगों की सेवा कर सकें। इसी भावना से उन्होंने बस्तर दशहरा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नियमित प्रसाद वितरण, भोजन और जलपान की व्यवस्था की है।बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का प्रतीक है।

माता की डोली से जुड़े विधि- विधानों से लेकर रथ निर्माण तक, इस आयोजन में अनेक समाजों और परंपरागत सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में श्रद्धालुओं और रथ निर्माताओं के लिए भोजन, नाश्ते और जलपान की व्यवस्था धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और सहभागिता का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।कुमार जयदेव ने बताया कि माता की डोली की विदाई तक सेवा संबंधी व्यवस्थाएं जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
बस्तर दशहरा की परंपराओं के निर्वहन में जुटे कारीगरों, पुजारियों, गुनिया और श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने की यह पहल आयोजन में जनभागीदारी और सेवा भावना को रेखांकित करती है।