काचनगादी से बाहार रैनी तक विभिन्न पारंपरिक रस्मों में हुए शामिल, महाराजा कमलचंद भंजदेव के साथ कुम्हड़ाकोट में निभाई नयाखानी की परंपरा
23 अक्टूबर 2026 जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा में भोपालपट्टनम ज़मींदारी परिवार के भाग्यांश आदिनारायण राज पामभोई अपने भाइयों क्षितिज पामभोई, मानस पामभोई एवं साहित्य राज पामभोई के साथ लगातार विभिन्न पारंपरिक आयोजनों में शामिल हुए। काचनगादी से लेकर बाहार रैनी तक उनकी उपस्थिति बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव के रूप में सामने आई।बस्तर राजपरिवार के महाराजा कमलचंद भंजदेव के साथ भाग्यांश एवं उनके भाइयों ने कुम्हड़ाकोट में आयोजित नयाखानी की पारंपरिक रस्म में सहभागिता निभाई।
इसके बाद रथ से जुड़ी पारंपरिक रस्मों और अन्य आयोजनों में भी वे उपस्थित रहे। इस दौरान बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक आयोजनों और आने वाली पीढ़ी की भूमिका जैसे विषयों का महत्व प्रमुखता से सामने आया।परंपरा के साथ जनसेवा और सामाजिक जुड़ाव का संदेशबस्तर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर के जनजातीय समाज की आस्था, सामूहिक सहभागिता और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। इस महापर्व में भोपालपट्टनम ज़मींदारी परिवार की सहभागिता क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव को दर्शाती है।
भाग्यांश की सक्रिय उपस्थिति को नई पीढ़ी के सामाजिक जीवन और पारंपरिक आयोजनों से जुड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र की जनता से संवाद, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण, युवाओं की भागीदारी और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।नई पीढ़ी की भूमिका पर जोरभाग्यांश आदिनारायण राज पामभोई अपने भाइयों के साथ बस्तर दशहरा के विभिन्न आयोजनों में शामिल होकर पारिवारिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित करते नजर आए।
क्षेत्र के सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना और स्थानीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना भी ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण संदेश है।बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए स्थानीय समाज से संबंध मजबूत करना और क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना सार्वजनिक जीवन में सकारात्मक सहभागिता के महत्वपूर्ण आधार हैं।
भोपालपट्टनम ज़मींदारी परिवार की इस सहभागिता ने बस्तर और भोपालपट्टनम के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।