
कलेक्टर आकाश छिकारा ने अधिकारियों की बैठक में बिचौलियों पर नकेल कसने सहित गड़बड़ी करने वालों पर सीधी एफआईआर के निर्देश
जगदलपुर, 04 नवम्बर 2026/ खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत बस्तर जिले में आगामी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इस धान खरीदी को पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान हितैषी बनाने के लिए जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में कलेक्टर आकाश छिकारा की अध्यक्षता में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल, डीआर डाहिरे सभी एसडीएम, तहसीलदार, खाद्य, सहकारिता व विपणन विभाग के अधिकारियों सहित जिले के समिति प्रबंधक और शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे। कलेक्टर ने बैठक में हिदायत दी कि खरीदी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य वास्तविक किसानों को शासन की योजना का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है, इसलिए बिचौलियों और कोचियों पर अंकुश लगाने सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान कलेक्टर ने सीमावर्ती क्षेत्रों विशेषकर ओडिशा सीमा से आने वाले अवैध धान और बिचौलियों द्वारा की जाने वाली रिसाइक्लिंग पर खरीदी के पहले ही दिन से कड़ी निगरानी रखने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी अमले को पाबंद किया कि जो किसान स्वयं टोकन लेकर आ रहा है, उसका भौतिक सत्यापन किया जाए और मौके पर सही दस्तावेज़ व गिरदावरी की सूक्ष्मता से जांच की जाए।
पिछले वर्षों में उपार्जन केंद्रों पर सामने आई धान की कमी (शॉर्टेज) और कथित अनियमितताओं पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी केंद्र पर जानबूझकर शॉर्टेज या गड़बड़ी पाई गई, तो समिति प्रभारी और डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ सीधे व्यक्तिगत नामजद एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसके साथ ही कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए संदिग्ध ऑपरेटरों व प्रभारियों के तत्काल स्थानांतरण और कर्मचारियों के नियमित रोटेशन के निर्देश भी जारी किए गए।
धान खरीदी में पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए यह निर्णय लिया गया कि बाढ़ या प्राकृतिक आपदा से प्रभावित जिन किसानों को 100 प्रतिशत अथवा आंशिक फसल क्षति का मुआवजा मिल चुका है, उनकी सूची सभी संबंधित उपार्जन केंद्रों को उपलब्ध कराई जाएगी। टोकन जारी करते समय इस सूची से अनिवार्य मिलान किया जाएगा ताकि मुआवजे के बाद उसी फसल के नाम पर दोबारा अवैध धान खपाने का कोई प्रयास न हो सके। तौल व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने कड़ा रुख दिखाया है, जिसके तहत केंद्रों पर केवल इलेक्ट्रॉनिक कांटे से ही निर्धारित मानक के अनुसार तौल सुनिश्चित करने को कहा गया है और ‘सूखत’ के नाम पर किसानों से अतिरिक्त धान लेने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साथ ही दैनिक रूप से बोरों की सटीक गिनती और तय मापदंडों के अनुसार स्टैकिंग अनिवार्य की गई है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की मंशानुसार राइस मिलर्स के लिए डिलीवरी ऑर्डर 15 जनवरी के उपरांत ही व्यापक स्तर पर काटा जाएगा। ऐसी स्थिति में तब तक उपार्जन केंद्रों पर धान के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त जगह, चबूतरे, ड्रेनेज, भूसा और तिरपाल की मुकम्मल व्यवस्था समय रहते पूरी कर ली जाए ताकि अचानक होने वाली बारिश या मौसमी बदलाव से उपज को कोई नुकसान न पहुंचे।
व्यवस्थाओं की पूर्व जांच के उद्देश्य से जिले के सभी उपार्जन केंद्रों में 8 नवंबर तक अनिवार्य रूप से ट्रायल रन पूरा करने तथा नए व पुराने बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा कर समय सीमा में सभी समितियों तक बारदाने पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में सभी एसडीएम, तहसीलदार व पटवारियों को लगातार खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए, ताकि 15 नवंबर से प्रारंभ होने जा रहे धान खरीदी के दौरान जिले के किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत हो सके।