
20 दिन बाद भी किसानों को राहत नहीं,सरकार की घोषणाएं अब सिर्फ कागजों तक सीमित, आमागुड़ा चौक पर कांग्रेस ने चक्काजाम कर राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
उचित मुआवजा देना छोड़ राहत के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा दे रही भाजपा सरकार- सुशील मौर्य
5 नवंबर 2026, जगदलपुर।
बस्तर संभाग में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित किसानों और आम नागरिकों को पर्याप्त मुआवजा एवं राहत प्रदान करने की मांग को लेकर आज संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर ग्रामीण के संयुक्त तत्वाधान में शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य व ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला के नेतृत्व में बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने आमागुड़ा चौक पर चक्काजाम कर भाजपा सरकार के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने किसानों को ₹65,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने, बाढ़ प्रभावित किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण माफ करने तथा प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के पश्चात महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की गई।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि हाल ही में बस्तर संभाग, विशेषकर जगदलपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ के कारण किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेतों में लगी फसल के साथ किसानों की महीनों की मेहनत, लागत और पूंजी भी पानी में बह गई। आज किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उनके सामने अगली फसल की तैयारी करने के साथ-साथ बैंक ऋण चुकाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी है।भाजपा सरकार की राहत नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ से हुए भारी नुकसान के बाद किसानों को ₹3,000 प्रति एकड़ अथवा ₹8,000 प्रति हेक्टेयर जैसी सीमित सहायता दिए जाने की बात कही जा रही है।
वर्तमान समय में जुताई, बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इतनी कम सहायता राशि से किसानों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी? क्या सरकार को वास्तव में किसानों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा है? बाढ़ में जिन किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई, उन्हें इतनी मामूली सहायता देकर किस तरह दोबारा खेती के लिए तैयार होने की उम्मीद की जा सकती है?विडंबना यह है कि जिन किसानों की फसल और आजीविका बाढ़ ने छीन ली, उनके सिर पर बैंक कर्ज का बोझ आज भी बना हुआ है। सरकार को किसानों की पीड़ा समझते हुए केवल औपचारिक सहायता की घोषणा करने के बजाय उनके KCC ऋण माफ करने का निर्णय लेना चाहिए।
बाढ़ प्रभावित किसानों एवं परिवारों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस पार्टी ने पूर्व में 15 अक्टूबर 2026 को कलेक्टरेट तक मार्च कर ज्ञापन सौंपा था और शासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन लगभग 20 दिन बीत जाने के बाद भी शासन की ओर से न तो किसानों को पर्याप्त राहत देने की कोई ठोस घोषणा हुई और न ही उनकी प्रमुख मांगों पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है। सरकार की इस उदासीनता के विरोध में कांग्रेस को सड़क पर उतरकर चक्का जाम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कांग्रेस पार्टी की प्रमुख मांगें हैं-
1.किसानों को ₹65,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। बाढ़ से पूरी तरह बर्बाद हुई फसलों और किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वास्तविक नुकसान के अनुरूप ₹65,000 प्रति एकड़ की दर से मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि किसान आर्थिक संकट से उबरकर आगामी फसल की तैयारी कर सकें।
2.बाढ़ प्रभावित किसानों का KCC ऋण माफ किया जाए। जिन किसानों की फसलें बाढ़ के कारण बर्बाद हुई हैं, उनके किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण को तत्काल माफ करने का निर्णय लिया जाए, ताकि किसानों पर कर्ज का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
3.नुकसान का निष्पक्ष एवं पारदर्शी सर्वेक्षण कराया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों, मकानों, मवेशियों, घरेलू सामानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। कोई भी वास्तविक प्रभावित किसान या परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहे।
4.राहत राशि वितरण की समयसीमा निर्धारित की जाए। सभी पात्र प्रभावित किसानों एवं परिवारों को मुआवजा और सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए। भुगतान में देरी और लापरवाही के लिए प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
5.बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए। जिन परिवारों के मकान, घरेलू सामान और जीवनयापन के साधन बाढ़ में नष्ट हुए हैं, उन्हें वास्तविक नुकसान के अनुरूप आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन शुरू कर सकें।
भाजपा सरकार किसानों के हितों की बात तो करती है, लेकिन जब बस्तर के किसान प्राकृतिक आपदा से तबाह हैं, तब उन्हें पर्याप्त मुआवजा देने और कर्ज से राहत दिलाने के लिए ठोस निर्णय का इंतजार करना पड़ रहा है। आखिर किसानों को राहत देने के लिए सरकार को और कितने ज्ञापन और आंदोलनों का इंतजार है? केवल घोषणाओं और आश्वासनों से किसानों के खेतों में दोबारा फसल नहीं लहलहाएगी। इसके लिए सरकार को आर्थिक मदद के रूप में वास्तविक राहत देनी होगी।
जिला कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित किसानों और परिवारों को उनका अधिकार दिलाने की यह लड़ाई जारी रहेगी। सरकार को चाहिए कि वह राजनीतिक बयानबाजी और कागजी घोषणाओं से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर प्रभावितों की पीड़ा समझे और तत्काल मुआवजा वितरण एवं KCC ऋण माफी पर निर्णय ले। किसानों को राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।
ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा कि बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ ने किसानों और आम नागरिकों को गहरी आर्थिक चोट पहुंचाई है। अनेक किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और ग्रामीण परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा है। खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों के लिए फसल का नुकसान केवल एक मौसम का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे वर्ष की आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने जैसा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावित किसानों और परिवारों को तत्काल पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना होगा। जब किसान की फसल ही नहीं बची तो वह बैंक का कर्ज कहां से चुकाएगा? अगली फसल के लिए बीज, खाद और खेती की अन्य आवश्यकताओं की व्यवस्था कैसे करेगा? सरकार को केवल सर्वे और सहायता की औपचारिकताओं में उलझाने के बजाय किसानों को ₹65,000 प्रति एकड़ मुआवजा और KCC ऋण माफी का लाभ तत्काल प्रभाव से देना चाहिए।
इस दौरान पूर्व विधायक रेखचंद जैन, किसान नेता लखेश्वर कश्यप, जिला उपाध्यक्ष लेखन बघेल, किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप,महादेव, महामंत्री अभिषेक नायडू,ब्लॉक अध्यक्ष संतोष सेठिया,सहदेव नाग,बलराम यादव,नीलकंठ, बुधराम, लक्ष्मी भारती, बुधप्रकाश, रमेश,पुरण कश्यप,प्रकाश आदि मौजूद रहे।