report rishabh kumar

जगदलपुर, 29 जुलाई 2025 – बकावंड विकासखंड के ग्राम जैतगिरी के निवासी रतन चंदेल की कहानी उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मेहनत और ईमानदारी से जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं। कभी दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले रतन चंदेल आज आत्मनिर्भर बुनकर बन चुके हैं।

44 वर्षीय रतन चंदेल की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने दो वर्ष पूर्व जिला हाथकरघा कार्यालय, जगदलपुर से संबद्ध दंतेश्वरी बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, जगदलपुर से जुड़ने का निर्णय लिया। समिति द्वारा प्रदान किए गए बुनकर प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने हाथ में करघा थाम लिया और बुनाई के कार्य में जुट गए।

आज रतन चंदेल प्रतिदिन औसतन 17 मीटर कपड़े की बुनाई करते हैं और साल भर में लगभग 6120 मीटर कपड़ा तैयार करते हैं। इससे उन्हें वर्ष 2024-25 में करीब 2 लाख रुपये की आमदनी हुई है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक है।

रतन चंदेल ने कहा, “अब हमारा परिवार आत्मनिर्भर हो चुका है। यह बदलाव दंतेश्वरी बुनकर समिति और जिला हाथकरघा कार्यालय की बदौलत संभव हो सका है।” उन्होंने अन्य बुनकरों से भी आग्रह किया कि वे ईमानदारी और मेहनत से कार्य करें, जिससे वे भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में उन्हें समिति की अन्य योजनाओं का भी लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हो सके।

रतन चंदेल की यह कहानी न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बुनकरों की भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं और सहयोग से किस प्रकार आम जनजीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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