चरवाहे से आईपीएस अफसर बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा: बिरेदेव सिद्धप्पा धोंडे
रिपोर्ट: ओम साहू

कोल्हापुर जिले के यमगे गांव के रहने वाले बिरेदेव सिद्धप्पा धोंडे ने अपनी कड़ी मेहनत और अडिग संकल्प के साथ आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 551वीं रैंक हासिल कर, बिरेदेव ने साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

बिरेदेव का प्रारंभिक जीवन अत्यधिक कठिनाइयों से भरा था। वह एक साधारण पारंपरिक चरवाहे परिवार से ताल्लुक रखते थे, जहां शिक्षा के लिए सुविधाएं बहुत सीमित थीं। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी पढ़ाई में जबरदस्त मेहनत की और 10वीं कक्षा में 96% अंक प्राप्त किए। इसके बाद, पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (COEP) से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

कॉलेज के बाद, बिरेदेव ने पोस्टमैन की नौकरी भी की, लेकिन उनका सपना हमेशा सिविल सेवा में जाने का था। वह किसी कोचिंग संस्थान से मार्गदर्शन नहीं लेते थे, बल्कि अपने घर के पास खुले आकाश के नीचे भेड़-बकरियों को चराते हुए दिन-रात अपनी पढ़ाई करते थे। यही नहीं, उन्होंने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।

जब उन्हें अपनी सफलता का पता चला, तो वह उस समय बेलगांव  में अपने मवेशियों के साथ थे। उनके परिवार और गांववालों ने इस शानदार सफलता का जश्न मनाया और बिरेदेव को पारंपरिक पीली पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। यह पगड़ी न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का प्रतीक थी, बल्कि यह उनके पूरे समुदाय की गौरवपूर्ण भावना को दर्शाती थी।

बिरेदेव की इस सफलता की कहानी न केवल चमत्कारी है, बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि अगर किसी के पास अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठा और धैर्य हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष और समर्पण से किसी भी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।

अब बिरेदेव का लक्ष्य सिर्फ अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने अनुभवों के आधार पर समाज की सेवा करने के लिए तैयार हैं। उनकी प्रेरणादायक यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में अपने सपनों को साकार किया जा सकता है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

Leave a Reply