स्थान: जगदलपुर, बस्तर
पत्रकारिता के एक योद्धा की संघर्षगाथा
वरिष्ठ पत्रकार एवं जन आलाप छत्तीसगढ़ के संपादक प्रदीप गोस्वामी का हाल ही में रॉड और स्क्रू हटाने का ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह ऑपरेशन उनके पांच साल पुराने सड़क हादसे के बाद लम्बे संघर्ष का परिणाम था। इस दौरान प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं मिला, बल्कि बार-बार केवल झूठे आश्वासन ही दिए गए।
बस्तर सांसद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक जैसे जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने पत्रकार समाज सहित आम जनता में भी गहरी नाराजगी उत्पन्न की है।
हादसे की पृष्ठभूमि: कब, कहां और कैसे?
तारीख: 2 दिसंबर 2019
स्थान: ग्राम तिरिया वनपरिक्षेत्र
समय: रात 7:40 बजे
2019 नगरीय निकाय चुनाव के दौरान प्रदीप गोस्वामी समाचार संकलन कर लौट रहे थे, तभी सड़क चौड़ीकरण के कार्य में लापरवाही (सूचना बोर्ड का अभाव और भारी वाहन की तेज रोशनी) के चलते उनकी बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में उनका बायां पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ।
कांग्रेस शासन का सहयोग
घटना के तुरंत बाद 112 सेवा की मदद से उन्हें डिमरापाल मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहाँ से रायपुर रेफर किया गया। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के सहयोग से रायपुर में सफल सर्जरी हुई, जिसमें एक रॉड और सात स्क्रू लगाए गए। डॉक्टरों ने उन्हें 7-8 महीने के बेड रेस्ट की सलाह दी थी।
भाजपा शासन में उपेक्षा और पत्रकार सुरक्षा कानून की अनदेखी
भाजपा के सत्ता में आने के बाद से प्रदीप गोस्वामी ने विधायक, सांसद, प्रदेश महामंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक कई बार आवेदन दिए, लेकिन कहीं से भी सहायता नहीं मिली। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
5 वर्षों का संघर्ष और सफल ऑपरेशन
लगभग पांच वर्षों तक लगातार पीड़ा सहने के बाद, हाल ही में माँ दंतेश्वरी प्राइवेट क्लिनिक, जगदलपुर में उनका ऑपरेशन हुआ और रॉड एवं स्क्रू हटाए गए। डॉक्टरों ने अब पुनः 1.5 से 2 महीने के बेड रेस्ट की सलाह दी है।

पत्रकार समाज और सामाजिक संगठनों की मांग
बस्तर अंचल के पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने प्रदीप गोस्वामी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है और यह भी मांग की है कि पत्रकारों के लिए चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सहयोग की स्थायी व्यवस्था की जाए।
निष्कर्ष: सत्ता के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक पत्रकार की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की उपेक्षा जनता की नजरों में सत्ता की साख गिरा सकती है। निष्पक्ष पत्रकारिता की अनदेखी, लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती है और अंततः इसका खामियाज़ा शासन को ही भुगतना पड़ता है।
Pradeep goswami mo no +919165123307


