रिपोर्ट ओम साहू

बस्तर के भोले-भाले आदिवासियों का शोषण कर रहे बाहरी नक्सली, सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत

बस्तर में नक्सली हिंसा का असली चेहरा अब साफ हो रहा है। बाहरी राज्यों से आए नक्सली लीडर बस्तर के गरीब, मासूम आदिवासियों को बंदूक की नोक पर जबरन अपने गिरोह में भर्ती कर रहे हैं। सेंट्रल कमेटी में शामिल दक्षिण भारतीय नक्सली नेता खुद ऐशो-आराम की जिंदगी बिता रहे हैं, जबकि बस्तर के सीधे-सादे आदिवासियों को जबरदस्ती नक्सल संगठन में झोंककर मरने के लिए आगे कर दिया जाता है।

तेलुगु में शांति वार्ता का पत्र, हैदराबाद में बैठक – बस्तर को लूटकर दक्षिण में मस्ती

आश्चर्य की बात यह है कि नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के नेता बस्तर को अपना ठिकाना बनाकर यहां के संसाधनों की लूट कर रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति और फैसले लेने की बैठकें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में होती हैं। हाल ही में जारी किया गया शांति वार्ता का पत्र भी तेलुगु भाषा में लिखा गया है, जिससे साफ है कि इसका मकसद सिर्फ एक दिखावा है।

बस्तर के जंगलों में निर्दोष आदिवासी मारे जा रहे हैं, लेकिन नक्सली लीडर हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में बैठकर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। ये लोग बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं और यहां के भोले-भाले लोगों को डराकर, धमकाकर और जान से मारकर नक्सली बना रहे हैं।

नक्सली हिंसा से बस्तर के आदिवासी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे

पिछले कई दशकों से बस्तर के मासूम आदिवासी नक्सली हिंसा की चपेट में हैं। उन्हें उनके घरों से बेदखल किया गया, परिवार उजड़ गए, हजारों निर्दोषों की हत्याएं हुईं। केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी।

  1. आदिवासियों को जबरन नक्सलवाद में धकेला गया, उनकी शिक्षा और भविष्य बर्बाद कर दिया गया।
  2. महिलाओं और बच्चों को भी इस हिंसा का शिकार बनाया गया, जिससे उनके जीवन पर गहरा मानसिक असर पड़ा।
  3. स्थानीय लोगों को विकास कार्यों से वंचित रखा गया, जिससे गरीबी और बेरोजगारी बढ़ती गई।
  4. जो आदिवासी नक्सलियों के खिलाफ खड़े हुए, उन्हें बेरहमी से मारा गया या गांव छोड़ने पर मजबूर किया गया।

बस्तर की मासूम जनता अब इस शोषण से आजादी चाहती है, वे नक्सली नहीं बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें मजबूर किया गया। अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह अत्याचार समाप्त हो।

बस्तर और छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों का राष्ट्रीय विकास में योगदान

छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर खनिज संसाधनों का भंडार है। भारत की अर्थव्यवस्था में इसका अहम योगदान है:

  1. बस्तर में लौह अयस्क, बॉक्साइट और कोयले के बड़े भंडार हैं, जो देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं।
  2. स्टील और पावर प्लांट्स के लिए जरूरी कच्चा माल यहां से जाता है, जिससे राष्ट्रीय उत्पादन में तेजी आती है।
  3. छत्तीसगढ़ देश के कुल खनिज उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  4. यहां के वनों और जैव विविधता से आयुर्वेद और औद्योगिक उत्पादों के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं।

लेकिन नक्सलियों के आतंक के कारण यहां के संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। अगर बस्तर को नक्सल मुक्त कर दिया जाए, तो यह पूरे देश के विकास में और अधिक योगदान दे सकता है।

सरकार को अब एक्शन लेना होगा – बाहरी नक्सलियों की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त हो

बस्तर में नक्सल समस्या के असली गुनहगार यही बाहरी नक्सली नेता हैं। सरकार को अब इनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाना होगा।

  1. सभी दक्षिण भारतीय नक्सली लीडर्स को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।
  2. इनकी अवैध संपत्तियों को जब्त किया जाए, ताकि इनके आर्थिक स्रोत खत्म हों।
  3. जो अभी भी सेंट्रल कमेटी में शामिल हैं, उनका एनकाउंटर किया जाए, ताकि भविष्य में कोई निर्दोष आदिवासी इनके झांसे में न आए।
  4. बस्तर के स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार देकर इन्हें मुख्यधारा में जोड़ा जाए।
  5. राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को इन बाहरी नक्सली नेटवर्क पर नजर रखनी होगी, ताकि देश के अन्य हिस्सों में यह समस्या दोबारा न पनपे।
  6. सरकार को इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर उठाकर इसे एक मिशन बनाना होगा, जिससे पूरे देश को यह संदेश मिले कि अब नक्सलवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

केंद्र सरकार की निर्णायक कार्रवाई – ऑपरेशन की खुली छूट ने बदला हालात

गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए सुरक्षा बलों को ऑपरेशन की खुली छूट दी गई है। इसी का नतीजा है कि वर्षों से निर्दोष जनता का शोषण करने वाले ये शातिर नक्सली अब शांति वार्ता की बात कर रहे हैं। ऑपरेशन की तेज़ी और सुरक्षाबलों के आक्रामक रुख से इन नक्सलियों के हौसले पस्त हो गए हैं। अब इनकी चालबाजी को समझकर सरकार को इनके झांसे में नहीं आना चाहिए और इनका पूरी तरह सफाया करना चाहिए।

गृह मंत्री विजय शर्मा से उम्मीदें – बस्तर के इतिहास में अमिट नाम लिखने का समय

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री श्री विजय शर्मा जी एक सॉफ्ट हार्टेड व्यक्ति हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा देश के वीर बलिदानियों और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति दिखाई है। यही सहानुभूति उन्हें बस्तर के पीड़ित आदिवासी परिवारों के प्रति भी दिखानी होगी। पिछले कई दशकों में हजारों निर्दोष आदिवासी मारे गए हैं, बेघर हुए हैं, और शोषण का शिकार बने हैं।

अब समय आ गया है कि बस्तर के इतिहास को नया मोड़ दिया जाए। इन नक्सली नेताओं का खात्मा ही आदिवासी समाज को नक्सलवाद की जड़ों से मुक्त कर सकता है। विजय शर्मा जी को अब निर्णायक कदम उठाकर नक्सलियों के शोषण का बदला लेना होगा। बस्तर की जनता यही चाहती है।

नक्सलवाद खत्म करने के लिए राष्ट्रीय मिशन जरूरी

बस्तर में नक्सल समस्या अब सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं रही, यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला बन चुकी है। केंद्र सरकार को इसे ‘ऑपरेशन नेशनल क्लीनअप’ की तरह लेना होगा, जिससे देश के अन्य प्रभावित राज्यों – झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी इनकी जड़ें समाप्त की जा सकें। सुरक्षा बलों को नई तकनीकों, ड्रोन निगरानी और खुफिया एजेंसियों के माध्यम से इन नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा।

निष्कर्ष:
बस्तर के मासूम आदिवासी न कभी नक्सली थे, न बनना चाहते थे। उन्हें जबरन बंदूक पकड़ाई गई। अब सरकार को चाहिए कि इन बाहरी नक्सली लीडरों का खात्मा कर बस्तर को शांति की राह पर लाए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह फैसला गृह मंत्री विजय शर्मा का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिख सकता है। बस्तर को नक्सल मुक्त बनाना अब बस एक कदम दूर है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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