 हरियाली अमावस्या पर माँ दंतेश्वरी के चरणों में हुई पूजा-अर्चना, रथ निर्माण के औजारों की हुई पारंपरिक पूजा

जगदलपुर, 24 जुलाई 2025
✍ रिपोर्ट: ओम साहू

बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ आज हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर हुआ। माँ दंतेश्वरी मंदिर परिसर में पाट जात्रा पूजा विधान के साथ पर्व की विधिवत शुरुआत हुई। इस पूजा में रथ निर्माण के लिए आवश्यक औजारों — ठुरलू खोटला और अन्य उपकरणों की पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की गई।

 जनप्रतिनिधियों और पारंपरिक सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति

इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, महापौर श्री संजय पांडे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, और सेवादार शामिल हुए। साथ ही कलेक्टर श्री हरिस एस, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल और जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस शुभ अवसर पर उपस्थित रहे।

 75 दिनों तक चलने वाला पर्व, ये हैं प्रमुख तिथियां

इस वर्ष बस्तर दशहरा पर्व लगभग 75 दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। प्रत्येक पूजा विधान एक निश्चित तिथि पर संपन्न होगा:

 05 सितम्बर – डेरी गड़ाई पूजा
 21 सितम्बर – काछनगादी पूजा
 22 सितम्बर – कलश स्थापना
 23 सितम्बर – जोगी बिठाई पूजा
 24 से 29 सितम्बर – नवरात्रि एवं रथ परिक्रमा
 30 सितम्बर – महाअष्टमी एवं निशा जात्रा पूजा
 01 अक्टूबर – कुंवारी पूजा, जोगी उठाई व मावली परघाव
 02 अक्टूबर – भीतर रैनी व रथ परिक्रमा
 03 अक्टूबर – बाहर रैनी व रथ परिक्रमा
 04 अक्टूबर – काछन जात्रा व मुरिया दरबार
 05 अक्टूबर – कुटुम्ब जात्रा (ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई)
 07 अक्टूबर – मावली माता की डोली की विदाई (समापन पूजा)

 बस्तर दशहरा दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जो शक्ति की आराधना और जनजातीय परंपराओं के साथ राजकीय-सामूहिक रूप में 75 दिनों तक मनाया जाता है। इसमें देवी की पूजा के साथ-साथ जनभागीदारी, परंपरा और प्रशासन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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