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करपावंड वन परिक्षेत्र के फरसंरा बीट में ग्राम सांवऱ के ग्रामीणों ने बड़ा आरोप लगाया है — वन विभाग के वेट गार्ड मंगल कश्यप पर 27 मजदूरों की कुल ₹1.87 की मेहनताना हड़पने का आरोप है।
मामले का सार:
- अगस्त 2024 में ग्राम फरसरा के मजदूरों ने बड़े जंगल में 20 दिन तक छटाई, सफाई, सीपीटी नाली, पौधा रोपण एवं छोटे पौधों को जड़ से उखाड़ने का काम किया।
- मजदूरों को प्रतिदिन ₹347 के हिसाब से भुगतान मिलना था, पर रकम उनके खातों में कभी पहुंची ही नहीं।
- मजदूरों का आरोप है कि रकम किसी अन्य खाते में डालकर निकाल ली गई। और उनको घुमाया जा रहा
मजदूरों के बयाँन
मजदूर सुकचद, रामधर, कमलेश, जयराम, रतीराम और अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें लगातार सिर्फ आश्वासन दिया गया कि “आज-कल पैसा आ जाएगा” — पर एक साल बीत जाने के बाद भी वे अपनी मेहनत की कमाई से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना: फिलहाल केवल 27 लोग ही सामने आए हैं, पर और भी कई मजदूरों की रकम अटकी हुई हो सकती है। यदि भुगतान न हुआ तो वे उच्च अधिकारियों डीएफओ से शिकायत कर आंदोलन पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं।
विभाग की प्रतिक्रिया
करपावंड रेंजर सौरभ रजक से जब मामले की जानकारी ली गई तो उन्होंने भुगतान की प्रक्रिया के बारे में अस्पष्ट और उलझन भरे जवाब दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि यह एक योजनाबद्ध घोटाला धोखाधड़ी — मजदूरों के हक पर सीधा दखल — जैसा मामला है।
# वनविभाग में ये नया नहीं और भी मामले को हमने उजागर किया है कुछ दिन पहले दाबगुड़ा का मामला हमारे द्वारा विभाग प्रमुख सीसीएफ R C दुग्गा जी के संज्ञान में लाया गया था
ग्रामीणों की मांग
- पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए।
- दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- अटकायी हुई रकम का तत्काल भुगतान किया जाए और अन्य प्रभावित मजदूरों की सूची सार्वजनिक की जाए।
आपका क्या विचार है?
क्या सिर्फ जांच से काम चलेगा, या दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजा आवश्यक है? नीचे कमेन्ट करें और इस खबर को शेयर करें ताकि दबाव बने।
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