
जगदलपुर, 15 अक्टूबर 2025 / रिपोर्ट: ओम साहू
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रयोगशाला प्रणाली सुदृढ़ीकरण पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम ने नई मिसाल कायम की — अब हर जिले की प्रयोगशालाएं होंगी अधिक सक्षम, सटीक और डिजिटल।
स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत प्रयोगशाला प्रणाली सुदृढ़ीकरण पर एक श्रृंखलाबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन जगदलपुर में किया गया। यह कार्यक्रम राज्य-स्तरीय पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता और कार्यकुशलता को बढ़ाना है।
यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम फाइंड द्वारा सीमेंस हेल्थीनियर्स की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के तहत “दक्ष परियोजना” के अंतर्गत आयोजित किया गया।
फरवरी–मार्च 2025 में हुए “ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स” सत्रों में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों द्वारा अब जिले स्तर पर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि गुणवत्ता मानक और संचालन दक्षता हर स्तर पर एकसमान रह सके।
कार्यक्रम में कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिलों के लैब तकनीशियन, जिला प्रयोगशाला अधिकारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में क्वालिटी एश्योरेंस, बायोसेफ्टी, उपकरण रखरखाव, डेटा प्रबंधन और लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम जैसे डिजिटल उपकरणों पर व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
डॉ. नवीन रंजन (फाइंड टीम) ने कहा — हर स्तर पर प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाना समयबद्ध, विश्वसनीय और मानकीकृत निदान सेवाओं के लिए आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कैस्केड मॉडल से जिला स्तरीय प्रशिक्षक आगे ज्ञान को स्थायी रूप से फैलाने में सक्षम होंगे।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य की दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने भी निदान सेवाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन डॉ. नेहा सर्जल, डॉ. भाग्यलक्ष्मी और सुश्री संगीता साहू ने किया, जबकि समन्वय का कार्य श्री अंजय गुप्ता एवं श्री देवेंद्र कुमार ने संभाला।
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🔹 यह रिपोर्ट सीमेंस हेल्थीनियर्स की CSR पहल एवं फाइंड संगठन द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आधारित है।