ग्रामीण महिलाओं के संग किया महुआ संग्रहण



जगदलपुर, 25 फरवरी 2026/ संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के बस्तर प्रवास का तीसरा दिन प्राकृतिक सौंदर्य के अन्वेषण और स्थानीय कौशल के तकनीकी संवाद के नाम रहा। बुधवार, 25 फरवरी की सुबह सुश्री किर्सी ने धुड़मारास के वन परिक्षेत्र में ‘नेचर एंड एविफुनल ऑब्जर्वेशन वॉक’ (पक्षी दर्शन यात्रा) के साथ अपने दिन का आरम्भ किया।

          स्थानीय गाइडों और प्रकृति प्रेमियों के साथ जंगल की पगडंडियों पर चलते हुए उन्होंने बस्तर की जैव विविधता और स्थानीय वन पारिस्थितिकी तंत्र का बारीकी से विश्लेषण किया। वहीं इस दौरान किर्सी ह्यवैरिनेन ने ग्रामीण महिलाओं के साथ महुआ संग्रहण कर अभिभूत हुईं।

        कोटमसर गुफा की भव्यता और सांस्कृतिक विरासत का अनुभ

         सुबह के भ्रमण के पश्चात सुश्री किर्सी का काफिला विश्व प्रसिद्ध कोटमसर गुफा पहुँचा। यहाँ उन्होंने गुफा की प्राकृतिक संरचनाओं का अवलोकन करने के साथ ही कोटमसर इको-डेवलपमेंट समिति और पर्यटन विक्रेताओं के साथ महत्वपूर्ण संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर तकनीकी चर्चा की।

         दोपहर के समय बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि का एक और अध्याय तब खुला जब सुश्री किर्सी के समक्ष धुरवा जनजातीय नृत्य दल ने पारंपरिक मंडई, डंडारी और गुरगाल नाचा की शानदार प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों की थाप पर हुए इन नृत्यों ने विदेशी अतिथि को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक विशेषज्ञों द्वारा उन्हें इन नृत्यों के ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व की तकनीकी जानकारी भी दी गई।

  बांस हस्तशिल्प और स्थानीय हुनर को वैश्विक दृष्टि

           दोपहर के भोजन के उपरांत सुश्री किर्सी ने धुड़मारास में स्थानीय बांस शिल्पियों और कारीगरों के साथ ‘तकनीकी इंटरैक्शन’ सत्र में भाग लिया। उन्होंने बस्तर के प्रसिद्ध बांस हस्तशिल्प की बारीकियों को समझा और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादों के परिष्करण के सुझाव दिए।

       इसके साथ ही उन्होंने ‘कल्चर वॉक’ को जारी रखते हुए ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं का अनुभव किया। दिन का समापन धुरवा डेरा होमस्टे में  डीब्रीफ सत्र के साथ हुआ, जहाँ पूरे दिन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित इस प्रवास का उद्देश्य बस्तर के ग्रामीण पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है।

संपादक – ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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