सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन ने ग्रामीणों को दिया मंत्र


जगदलपुर, 27 फरवरी 2026/ किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सहयोग और संवाद की भावना सबसे बुनियादी जरूरत होती है और बस्तर के धुड़मारास गाँव में यह भावना उम्मीदों से कहीं बढ़कर देखने को मिली है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन ने भ्रमण के अंतिम दिन शुक्रवार को धुड़मारास के ग्रामीणों के साथ अपना बहुमूल्य समय साझा करते हुए जीवन के श्रेष्ठ अनुभवों को महसूस किया। उन्होंने ग्रामीणों के जीवन से सीखने की बात करते हुए विशेष रूप से यहाँ के प्लास्टिक मुक्त जीवन की सराहना की, जो आज पूरे विश्व के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है। धुड़मारास की यह उपलब्धि ही है कि आज यह गाँव विश्व के उन चुनिंदा 20 गाँवों के नेटवर्क में शामिल हो चुका है, जो अब एक-दूसरे से जुड़कर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा ले रहे हैं।

             सुश्री किर्सी ने जोर देकर कहा कि धुड़मारास पर्यटन के उन सभी वैश्विक मापदंडों को पूरा करता है जो ग्रामीण विकास की अवधारणा को साकार करते हैं। इस संवाद के दौरान ग्रामीणों ने भी अपने भीतर आए बदलावों को साझा करते हुए बताया कि पर्यटन की बारीकियों को समझने से पहले वे अनजाने में ही पेड़-पौधों और वन्य पशुओं को क्षति पहुँचाते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज यहाँ का हर निवासी अपने पर्यावरण के प्रति न केवल जागरूक है, बल्कि उसके संरक्षण के लिए भी समर्पित है। यह बदलाव केवल वैचारिक ही नहीं बल्कि आर्थिक भी है। पहले जहाँ जीवन यापन के लिए ग्रामीणों को पलायन करना पड़ता था, वहीं अब पर्यटकों के आने से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। इसका सीधा उदाहरण गाँव की बदलती जीवन शैली में दिखता है, जहाँ कभी ग्रामीणों के पास साइकिल तक नहीं थी, आज उनके पास अपनी मोटर साइकिलें मौजूद हैं। धुड़मारास की इस सफलता को देखते हुए अब अन्य गाँवों के लोग भी यहाँ सीखने के उद्देश्य से आ रहे हैं।

         भविष्य की रूपरेखा तय करते हुए सुश्री किर्सी ने पुनः वनीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अब यहाँ पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी रख सकते हैं और गाँव में आ रहे सकारात्मक बदलावों का दस्तावेजीकरण कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धुड़मारास का विकास पूरी तरह से यहाँ के निवासियों के हाथों में है, इसलिए योजना निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी ग्रामीणों को ही तय करनी होगी। उन्होंने सलाह दी कि योजनाएँ ऐसी हों जो धरातल पर उतर सकें और जिनसे धुड़मारास की वास्तविक छवि ही दुनिया के सामने आए। यहाँ की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की कहानियाँ तैयार कर लोगों से साझा की जानी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यहाँ की जानकारी यहीं के लोग पर्यटकों को दें।


             अंत में उन्होंने एक महत्वपूर्ण मंत्र देते हुए कहा कि जैसे एक वृक्ष अपनी जड़ों से बढ़ता है, वैसे ही ग्रामीण धुड़मारास की जड़ हैं। ग्रिंगो ट्रेल फिल्म के ट्रेलर और वैश्विक अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ग्लोबल नेटवर्क का उपयोग पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे पर्यटकों की आवश्यकता है जो इस स्थान और यहाँ के लोगों की तरह इस मिट्टी का सम्मान करें। धुड़मारास की मौलिकता को बनाए रखते हुए इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम बनाना अब ग्रामीणों के सामूहिक संकल्प पर निर्भर है। इस अवसर पर संचालक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान श्री नवीन कुमार के साथ ही बलौदाबाजार के वन मंडलाधिकारी श्री गणवीर धम्मशील विशेष रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की प्रतिनिधि सुश्री मंजिरी कमलापुरकर, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की प्रतिनिधि सुश्री शुभदा चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

सम्पादक – ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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