रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने किसानों की मांग को जोरदार ढंग से उठाया, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट नजर आए

        बस्तर संभाग के 44612 किसान धान बेच नहीं पाए
        किसानों को कर्ज कैसे पटाए चिंता सताने लगी है।

   जगदलपुर। बस्तर संभाग में धान खरीदी से जुड़े गंभीर मुद्दे को लेकर सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में तीखी बहस हुई। बस्तर विधायक एवं उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में बस्तर संभाग के किसानों की समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

       विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि बस्तर संभाग के सातों जिलों के हजारों किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था और पूरी उम्मीद के साथ खरीदी केंद्रों का रुख किया था, लेकिन बावजूद इसके बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार बस्तर संभाग के 44,612 किसानों का धान नहीं खरीदा गया, जो कि किसानों के हितों से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।

          बस्तर विधायक ने सदन में यह भी जानना चाहा कि इन किसानों में कितने किसान वन अधिकार पट्टा धारक, कितने ऋणी किसान और कितने अऋणी किसान हैं। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि आखिर किन कारणों से इतनी बड़ी संख्या में किसान धान बेचने से वंचित रह गए और इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है।

        लखेश्वर बघेल ने कहा कि यदि पंजीकृत हजारों किसानों का धान नहीं खरीदा जाता है तो यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है बल्कि पूरे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले की गंभीरता से जांच कर प्रभावित किसानों को राहत दी जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

          सदन में इस प्रश्न का जवाब देते हुए राज्य के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने जानकारी दी कि बस्तर संभाग के कुल 44,612 किसान धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं, जिसके कारण उनका धान नहीं खरीदा जा सका। मंत्री ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया शासन के निर्धारित नियमों और समय सीमा के अनुसार संचालित की गई थी।

           मंत्री के इस जवाब से बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल असंतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा कि सरकार का यह जवाब किसानों की वास्तविक समस्या को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं करता। किसान तहसील एसडीएम कलेक्टर ऑफिस खाद्य विभाग के चक्कर काटते नजर आ रहे थे लेकिन सरकार  लचर व्यवस्था के चलते किसानों का धान खरीद नहीं पाई।  लिंकिंग में  धान खरीदी नहीं होना छत्तीसगढ़ सरकार की नाकामी है।  किसान अपना कर्ज कैसे पटाएंगे  यह चिंता सताने लगी है। बस्तर विधायक श्री बघेल ने कहा कि कई स्थानों पर खरीदी केंद्रों में व्यवस्थागत समस्याएं, समय की कमी, परिवहन की दिक्कत और अन्य प्रशासनिक कारणों से किसान अपना धान नहीं बेच पाए।

        लखेश्वर बघेल ने जोर देते हुए कहा कि सरकार को यह विषय केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर के किसान लंबे समय से धान खरीदी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं और सरकार को किसानों की परेशानी को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालना चाहिए।

       सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन किसानों का धान किसी कारणवश नहीं खरीदा जा सका है, उनके लिए विशेष व्यवस्था बनाई जाए और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

             बस्तर के किसानों से जुड़ा यह मुद्दा विधानसभा में उठने के बाद एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विषय पर क्या ठोस कदम उठाती है और प्रभावित किसानों को किस प्रकार राहत प्रदान करती है।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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