जगदलपुर, 17 मार्च 2026/* कम संसाधनों में भी अत्यंत आकर्षक सामग्री तैयार की जा सकती है, इस बात को तितली संस्था के सहयोग से आयोजित सहायक शिक्षण सामग्री प्रतियोगिता में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदियों ने सच कर दिखाया है। कबाड़ से जुगाड़ की अवधारणा पर आधारित इस प्रतियोगिता में दीदियों ने अपनी सृजनशीलता का ऐसा परिचय दिया कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुएं अनमोल शिक्षण टूल्स में तब्दील हो गईं। नो कॉस्ट-लो कॉस्ट के सिद्धांत को अपनाते हुए इन कार्यकर्ताओं ने पुराने गत्तों, खाली बोतलों, ढक्कनों और कागज के रद्दी टुकड़ों का उपयोग कर बेहद कम समय में आकर्षक शिक्षण सामग्री तैयार की। जो आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को स्कूल पूर्व प्रारंभिक शिक्षा देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

       कबाड़ से जुगाड़ पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार करने वाले पुसपाल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रेमबत्ती नाग और चिचालगुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमुना दरियो कहती हैं यह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों कैसा बेहतर उपयोग कर सकते हैं इस दिशा में हम सभी मिलकर प्रयास किए हैं जो नौनिहालों को प्रेरक ढंग से लाभान्वित करने की सकारात्मक पहल है।

        इस नवाचार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए कठिन लगने वाले विषयों को समझना और भी सुलभ हो जाएगा। इन हस्तनिर्मित खिलौनों और चार्ट्स के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में रंगों की पहचान, गिनती का जादू और बुनियादी आकारों की समझ विकसित कर सकेंगे। प्रतियोगिता के दौरान यह स्पष्ट दिखा कि प्रभावी शिक्षण के लिए महंगे आधुनिक उपकरणों की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और रचनात्मक सोच की आवश्यकता होती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदियों का यह जज्बा न केवल शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि संकल्प दृढ़ हो, तो शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है। तितली संस्था और इन कर्मठ दीदियों का यह साझा प्रयास नन्हें नौनिहालों के भविष्य को गढ़ने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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