रिपोर्ट –जय शंकर पांडे



जगदलपुर, 01 अप्रैल 2026/ बच्चों के प्रारंभिक विकास और उनकी रचनात्मकता को नई दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में हाल ही में एक अत्यंत उत्साहजनक और प्रेरणादायक गतिविधि संपन्न हुई। तितली संस्था के सहयोग से आयोजित इस “नेम टैग बनाओ” पहल के माध्यम से आंगनवाड़ी के नन्हे-मुन्नों ने न केवल कला का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी विशिष्ट पहचान की ओर भी एक मजबूत कदम बढ़ाया।


     इस गतिविधि के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों का माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आया, जहाँ बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कागजों पर उतारा। छोटे-छोटे हाथों ने रंग-बिरंगे स्केच और कलमों की मदद से खुद के नाम लिखे और बेहद सुंदर नेम टैग (आईडी कार्ड) तैयार किए। बच्चों द्वारा बनाए गए ये कार्ड केवल कागज के टुकड़े नहीं थे, बल्कि उनकी मेहनत और अपनी पहचान के प्रति गौरव का प्रतीक थे। जैसे ही इन बच्चों ने अपने हाथों से बने इन आईडी कार्ड्स को गले में पहना, उनके चेहरों पर एक अलग ही चमक और आत्मविश्वास देखने को मिला। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पहलू वह रहा जब इन नन्हे बच्चों ने अपने बनाए नेम टैग को पहनकर पूरी निडरता और उत्साह के साथ उपस्थित लोगों के सामने अपना परिचय दिया। यह अनुभव बच्चों के भीतर सार्वजनिक रूप से बोलने के डर को कम करने और आत्म-सम्मान की भावना जगाने में मील का पत्थर साबित हुआ। खेल-खेल में सीखने की यह प्रक्रिया बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं को विकसित करने का एक बेहतरीन उदाहरण है।



     इस अनूठी और सफल पहल के लिए तितली संस्था, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की जा रही है। बस्तर के इन आंगनवाड़ी केंद्रों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और रचनात्मक अवसर दिए जाएं, तो ग्रामीण अंचल के ये बच्चे भी आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान दुनिया के सामने रख सकते हैं। इस शानदार उपलब्धि और नवाचार के लिए सभी नन्हे प्रतिभागी और समर्पित कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं।

संपादक –ऋषभ कुमार

मो.–6266449977

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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