रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

बस्तर की जनजातीय स्वास्थ्य परंपराओं पर होगा वैज्ञानिक शोध

जगदलपुर, 11 अप्रैल 2026/ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और उनकी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक धरातल पर परखने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। प्राचार्य शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर के द्वारा जारी के अनुसार महाविद्यालय में प्रोजेक्ट रिसर्च फेलो और प्रोजेक्ट असिस्टेंट के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। यह नियुक्ति डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी – आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई द्वारा प्रायोजित एक विशेष शोध परियोजना के अंतर्गत की जाएगी, जिसे जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के तहत संचालित किया जा रहा है।

     इस शोध का मुख्य केंद्र छत्तीसगढ़ की अभुझमाड़िया और गोंड जनजातियों की स्वास्थ्य स्थितियों का विस्तृत मूल्यांकन करना है। परियोजना का शीर्षक “छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़िया और गोंड जनजातियों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने हेतु उनकी स्वास्थ्य स्थितियों का मूल्यांकन तथा पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों का वैज्ञानिक सत्यापन” रखा गया है। इसके माध्यम से न केवल इन जनजातियों की पारंपरिक चिकित्सा विधियों का वैज्ञानिक सत्यापन किया जाएगा, बल्कि उनके आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी कार्य होगा। यह शोध बस्तर की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

     इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। शोध और विकास के क्षेत्र में रुचि रखने वाले उम्मीदवार शैक्षणिक योग्यता और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.gkpgcjdp.ac.in का अवलोकन कर सकते हैं या संस्थान को ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

     स्थानीय स्तर पर शोध को बढ़ावा देने और जनजातीय विकास को वैज्ञानिक गति देने के उद्देश्य से निकाली गई यह भर्ती उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।

संपादक –ऋषभ कुमार

मो.–6266449977

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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