रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

दरभा, 8 मई 2026/ तीरथगढ़ जलप्रपात में वन विभाग द्वारा पार्किंग के नाम पर दो पहिया वाहन से 20 रु. वसूले जा रहे हैं, लेकिन बदले में पर्यटकों को पार्किंग की सुविधाएं तक नसीब नहीं।
मामले का सार – वन विभाग की अधिकृत पार्किंग में कार से 50 रु., बाइक से 20 रु. व बस की 100 रु. की रसीद काटी जा रही है। रसीद पर “वन मंडल जगदलपुर” की मुहर है। पर बाइक की पार्किंग स्थल पर न शेड है, न शौचालय, कचरे के डब्बे ओवरफ्लो, पूरे परिसर में प्लास्टिक-बोतल बिखरी हैं।

बस्तर को अधिकारियों ने अजायबघर समझ रखा है। जिसको जैसा मौका मिल रहा है वो वैसा लूटने में लगा है दूर दराज से जो पर्यटक आते हैं घूमने उम्मीद लेके लेकिन यहां आकर व्यवस्था को देखकर निराश हो जाते हैं।
जिसका जमीनी हकीकत हम आपको दिखा रहे है खुद पर्यटक की जुबानी
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जो विभाग ने व्यवस्था कर रखी है सुविधाओं के लिए, –जो पर्यटकों से शुल्क वसूलती है उसके बावजूद भी व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रही जिधर देखो गंदगी , बिखरे हुए प्लास्टिक बोतल, न सुविधा और ना ही शौचालय की व्यवस्था, जो भी पर्यटक बाहर से आते है इनकी व्यवस्था देखकर निराश हो जाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल–
तीरथगढ़ जलप्रपात में जो शुल्क विभाग के द्वारा वसूला जाता है लेकिन कोई भी सुविधा पर्यटक को क्यों नहीं दी जाती?
लेकिन शुल्क वसूलते हैं पर्यटकों से वो पैसा कहां जाता है?

अधिकारियों की जिम्मेदारी –
जिन अधिकारियों की ये जवाबदारी है व्यवस्था बनाए रखने की वो हकीकत जमीन पर नहीं दिख रही। और विभाग द्वारा ये दावा किया जाता है कि पर्यटकों को हमने सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
छत्तीसगढ़ के पहट (साप्ताहिक अखबार)
संपादक –ऋषभ कुमार
मो.–6266449977