रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 27 मई 2026/ बस्तर की ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पारंपरिक कौशलों सहित स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया है। अहमदाबाद के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने, जिसमें महिला एवं पुरुष विशेषज्ञ शामिल थे, बस्तर जिले के नेतानार गांव स्थित ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ (सीआरपीएफ कैंप परिसर) का विशेष रूप से भ्रमण किया। इस महत्वपूर्ण भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न आजीविका गतिविधियों को समझना, उन्हें आधुनिक डिजाइन से जोड़ना और उनके लिए बेहतर मार्केट लिंकेज की संभावनाएं तलाशना था। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन सहित वन, कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।



      इस भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले केंद्र में चल रहे सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का बेहद बारीकी से जायजा लिया। वहां काम कर रही स्थानीय दीदियों ने टीम से बातचीत करते हुए बताया कि वर्तमान में इस पूरे क्षेत्र के दस किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा सिलाई केंद्र उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण यहां कपड़ों की भारी मांग बनी रहती है। इसी मांग को देखते हुए ये महिलाएं प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अपने-अपने घरों के पास खुद का ‘बुटीक’ खोलने की बेहतरीन योजना बना रही हैं। एनआईडी की टीम ने महिलाओं के इस ऊंचे हौसले को खूब सराहा और उनसे चर्चा करते हुए उनके काम को और अधिक शानदार बनाने तथा नए बाजारों से जुड़ने के रचनात्मक तरीके साझा किए। 



         सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के बाद विशेषज्ञों की इस टीम ने बस्तर की पारंपरिक ढेकी चावल यूनिट और इमली प्रोसेसिंग यूनिट का भी सघन निरीक्षण किया। बस्तर की इस पारंपरिक ढेकी को, जो समय के साथ लगभग बंद हो चुकी थी, महिलाओं द्वारा पुनर्जीवित कर दोबारा काम शुरू करने के प्रयास की टीम ने विशेष रूप से सराहना की। दीदियों ने बताया कि वे इसके माध्यम से तैयार उत्पादों को प्रदेश के बाजारों में ले जाकर बेचती हैं और आगे जहां से भी मांग आएगी, वे वहां आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। इसके साथ ही इमली यूनिट में महिलाओं द्वारा मशीनों के माध्यम से इमली के बीज और नसें अलग कर पूरी साफ-सफाई के साथ ‘इमली चपाती’ बनाने, उसकी ब्रांडिंग करने और आकर्षक पैकेजिंग करने की पूरी कार्यप्रणाली को टीम ने देखा और इसे ग्रामीण स्तर पर एक बेहद बेहतरीन पहल बताया।

इन प्रमुख आजीविका गतिविधियों के अवलोकन के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने परिसर में स्थापित किए गए विशेष ‘सेवा केंद्र’ की उपयोगिता को भी समझा। यह केंद्र स्थानीय ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें बैंकिंग सेवाओं, पैसे जमा करने व निकालने, बीमा कार्यों और नागरिक कार्ड बनवाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अब दूर नानगुर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। सप्ताह में तीन दिन संचालित होने वाले इस केंद्र से ग्रामीणों की समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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