रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

जगदलपुर,27 मई 2026 / जिले में सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर केवल जनसमस्याओं के समाधान और योजनाओं की जानकारी का माध्यम ही नहीं बन रहे हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच भी साबित हो रहे हैं। बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और खानपान को नई पहचान दिलाने में नारी शक्ति महिला समूह बस्तर अहम भूमिका निभा रही है। जिले के विकासखंड बस्तर के अंतर्गत आयोजित सुशासन तिहार शिविरों में पहुंचने वाले ग्रामीणों, अधिकारियों और कर्मचारियों को यह महिला समूह बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मुहैया करवा रही है। समूह द्वारा रियायती दर पर चाय-नाश्ते के साथ मड़िया पेज, आमट, तिखुर शरबत, उड़द दाल बोबो जैसे स्थानीय व्यंजन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

विकासखंड मुख्यालय बस्तर के नारी शक्ति महिला समूह की अध्यक्ष रेवती नेताम ने बताया कि सुशासन तिहार के शिविरों में लगातार अच्छी बिक्री हो रही है। उन्होंने कहा कि हर शिविर में समूह द्वारा 7 से 8 हजार रुपए से अधिक का विक्रय किया जा रहा है, जिससे उनके समूह की महिलाओं के आय में बढ़ोतरी हुई है।
नारी शक्ति महिला समूह की सचिव पारो बघेल ने बताया कि बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ग्रामीणों के साथ-साथ शिविर में पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी भी बड़े चाव से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग इन व्यंजनों की सराहना कर रहे हैं और इससे स्थानीय खानपान संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।
महिला समूह की भागबत्ती भद्रे एवं अन्य सदस्यों का कहना है कि सुशासन तिहार ने उन्हें अपनी कला और पारंपरिक खानपान को प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि बस्तर की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को भी नई पहचान मिल रही है।शिविर में पहुंचने वाले ग्रामीणों और स्थानीय मैदानी अमले का मानना है कि इस तरह के प्रयास स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को प्रोत्साहित करने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।