रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

बड़ा आरोप:पर्दे के पीछे’ बैठे कुछ लोग फर्जी शिकायतों से फैला रहे हैं दहशत, सरकारी काम ठप
22 जून 2026, जगदलपुर। बस्तर के स्वास्थ्य महकमे से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के बीच आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। शासन द्वारा मान्यता प्राप्त *’छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन’ ने एक दूसरे गैर-मान्यता प्राप्त गुट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे अदालत जाने की चेतावनी दे दी है। आरोप है कि कुछ तथाकथित पदाधिकारी लगातार कर्मचारियों को टारगेट कर रहे हैं और फर्जी शिकायतों के दम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बाद जिले के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों में डर और भारी आक्रोश का माहौल है।
“पर्दे के पीछे से चल रहा है ब्लैकमेलिंग का खेल”
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन की बस्तर जिला अध्यक्ष **रीमा दानी** ने एक सनसनीखेज प्रेस नोट जारी किया है। रीमा दानी ने सीधे तौर पर ‘छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी संघ’ नाम के एक नए गुट पर उंगली उठाई है।
उन्होंने कहा: “इस नए संगठन को शासन स्तर पर कर्मचारियों के पक्ष में लेटरपैड इस्तेमाल करने या पत्राचार करने का कोई अधिकार ही नहीं है। इसके बावजूद इसके पदाधिकारी विभागीय मामलों में टांग अड़ा रहे हैं। निर्दोष कर्मचारियों को डराना, उनके खिलाफ झूठी शिकायतें करना और ब्लैकमेल कर शासकीय काम में बाधा डालना ही इनका मुख्य एजेंडा बन गया है।”
प्रशासन का ढीला रवैया:
पीड़ित कर्मचारियों ने इस मनमानी के खिलाफ बड़े अफसरों से शिकायत की थी। अफसरों ने जांच की बात तो कही, लेकिन महीनों बाद भी जांच की फाइल ठंडे बस्ते में है।
एकतरफा कार्रवाई से फूटा गुस्सा:
कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन उनके हक की बात नहीं सुनता, लेकिन दूसरे गुट की फर्जी शिकायतों पर तुरंत एक्शन ले लेता है।
6 महीने में एक भी काम नहीं:
रीमा दानी ने तंज कसते हुए कहा कि इस तथाकथित संगठन को बने 6 महीने हो गए, लेकिन कर्मचारियों की भलाई के लिए इन्होंने एक सुई तक नहीं उठाई। कुछ लोग पर्दे के पीछे से अपनी रोटियां सेक रहे हैं।
..तो अब सीधे कोर्ट में होगी लड़ाई!
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने अब सीधे शब्दों में शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। संगठन का कहना है कि अगर इस फर्जीवाड़े और मानसिक प्रताड़ना पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। अपने साथियों के सम्मान और हक के लिए संगठन बहुत जल्द
माननीय न्यायालय (हाईकोर्ट) का दरवाजा खटखटाएगा।
अब देखना यह होगा कि इस चेतावनी के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी क्या एक्शन लेते हैं।