रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

29 जून 2026, जगदलपुर/ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के महत्वपूर्ण दायित्व पर नियुक्ति के अवसर पर इंद्रावती बचाओ अभियान की ओर से सुंदरराज पी. (IPS) को मियाजाकी आम,के साथ फलों की टोकरी एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर आत्मीय सम्मान एवं हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

     बस्तर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शांति स्थापना, नक्सल उन्मूलन, आंतरिक सुरक्षा तथा जनविश्वास सुदृढ़ करने के क्षेत्र में दृढ़ नेतृत्व, अदम्य साहस और संवेदनशील कार्यशैली का परिचय दिया। उनके नेतृत्व में बस्तर ने सुरक्षा, विकास और स्थायी शांति की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं।


     भेंट के उपरांत आईजी बंगले परिसर में लगभग तीन वर्ष पूर्व इंद्रावती बचाओ अभियान के सदस्यों एवं सर के साथ सहपरिवार लगाए गए वाटर एप्पल, लीची, मलबेरी तथा अन्य फलदार एवं छायादार वृक्षों से विकसित हरित वाटिका का श्री सुंदरराज पी. सर के साथ अवलोकन किया गया। जो पौधे तीन वर्ष पहले लगाए गए थे, वे आज एक सघन, सुंदर और जीवनदायी हरित वाटिका का स्वरूप ले चुके हैं। यह प्रकृति संरक्षण, सामूहिक सहभागिता और निरंतर संवर्धन का प्रेरणादायी उदाहरण है।


     इन्हीं वृक्षों की शीतल छाँव में हम सभी अभियान के सदस्यों ने उनके साथ आत्मीय छायाचित्र भी लिए। यह अवसर बस्तर की हरित विरासत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के सुंदर संगम का अविस्मरणीय साक्ष्य बन गया।

इंद्रावती बचाओ अभियानट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के महत्वपूर्ण दायित्व पर नियुक्ति के अवसर पर इंद्रावती बचाओ अभियान की ओर से सुंदरराज पी. (IPS) को मियाजाकी आम,के साथ फलों की टोकरी एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर आत्मीय सम्मान एवं हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

    बस्तर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शांति स्थापना, नक्सल उन्मूलन, आंतरिक सुरक्षा तथा जनविश्वास सुदृढ़ करने के क्षेत्र में दृढ़ नेतृत्व, अदम्य साहस और संवेदनशील कार्यशैली का परिचय दिया। उनके नेतृत्व में बस्तर ने सुरक्षा, विकास और स्थायी शांति की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं।


      भेंट के उपरांत आईजी बंगले परिसर में लगभग तीन वर्ष पूर्व इंद्रावती बचाओ अभियान के सदस्यों एवं सर के साथ सहपरिवार लगाए गए वाटर एप्पल, लीची, मलबेरी तथा अन्य फलदार एवं छायादार वृक्षों से विकसित हरित वाटिका का  सुंदरराज पी. के साथ अवलोकन किया गया। जो पौधे तीन वर्ष पहले लगाए गए थे, वे आज एक सघन, सुंदर और जीवनदायी हरित वाटिका का स्वरूप ले चुके हैं। यह प्रकृति संरक्षण, सामूहिक सहभागिता और निरंतर संवर्धन का प्रेरणादायी उदाहरण है।
इन्हीं वृक्षों की शीतल छाँव में हम सभी अभियान के सदस्यों ने उनके साथ आत्मीय छायाचित्र भी लिए। यह अवसर बस्तर की हरित विरासत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के सुंदर संगम का अविस्मरणीय साक्ष्य बन गया।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

Leave a Reply