रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

बीजापुर 21 जुलाई 2026- छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुसार तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के निर्देशानुसार 20 जुलाई 2026 को इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर मुख्यालय में छत्तीसगढ़, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र के वरिष्ठ वन अधिकारियों की एक दिवसीय उच्चस्तरीय अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सीमावर्ती वन क्षेत्रों में वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण-संवर्धन, वन अपराधों की रोकथाम तथा अंतर्राज्यीय वन्यजीव प्रबंधन एवं समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाना था। बैठक में तीनों राज्यों के अधिकारियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा एवं जैव विविधता के संरक्षण के लिए साझा कार्ययोजना तैयार की।
बैठक में सीमावर्ती वन क्षेत्रों की सुरक्षा सुदृढ़ होगी, तीनों राज्यों की सीमाओं पर स्थित वन चौकियों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। साथ ही लकड़ी तस्करी, अवैध कटाई एवं अतिक्रमण पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
डिजिटल इंटेलिजेंस नेटवर्क होगा विकसित
छत्तीसगढ़, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र के वन अधिकारियों के बीच त्वरित सूचना आदान-प्रदान के लिए साझा डिजिटल संचार प्रणाली एवं व्हाट्सएप समन्वय समूह का गठन किया जाएगा।
संयुक्त गश्त और एंटी-स्नेयर वॉक- सीमावर्ती जंगलों एवं संवेदनशील वन्यजीव गलियारों में तीनों राज्यों के वन अमले द्वारा नियमित संयुक्त गश्त एवं एंटी-स्नेयर वॉक संचालित किए जाएंगे, जिससे अवैध शिकार एवं अन्य वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
एंटी-पोचिंग नाइट पेट्रोलिंग – बाघ, तेंदुआ, वन भैंसा सहित अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के शिकार की रोकथाम के लिए विशेष एंटी-पोचिंग दलों द्वारा संयुक्त रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाएगी।
वन्यजीव कॉरिडोर एवं जल स्रोतों का संरक्षण- इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के संरक्षण, जल स्रोतों के विकास तथा स्थानीय ग्रामीणों की संरक्षण अभियानों में सहभागिता बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
बैठक में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक ने कहा कि वन अपराधी राज्य सीमाओं का लाभ न उठा सकें, इसके लिए तीनों राज्यों को एक इकाई के रूप में कार्य करना होगा। संयुक्त गश्त, रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने तथा समन्वित कार्रवाई के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा।
इस उच्चस्तरीय बैठक को सीमावर्ती वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा अंतर्राज्यीय समन्वय को नई मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।