रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

30 अगस्त 2026, रायपुर: अगर चाय पीने के लिए वे पांच दोस्त कुछ देर के लिए नहीं रुकते तो नेपाल में बुधवार को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई अचानक बाढ़ में बह सकते थे। हालांकि, वे सुरक्षित बच गए लेकिन इसके बाद उन्हें दो दिन तक एक ऊंची जगह से उफनती त्रिशूली नदी का भयावह रूप देखते हुए चिंता में बिताने पड़े।
रायपुर के माना कैंप क्षेत्र के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर (सभी की उम्र 50 से 60 वर्ष के बीच) शनिवार को अपने घर लौटे। सैलून चलाने वाले 53 वर्षीय नारायण सेन ने बताया, हम भाग्यशाली थे कि 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आने के समय हम चाय पीने के लिए रुक गए थे।

अगर हम 10-15 मिनट पहले निकल गए होते तो शायद फंस गए होते।


“उन्होंने कहा, अगर हम वहां नहीं रुकते तो पता नहीं क्या होता। पांच दोस्तों का ये समूह 21 अगस्त को रायपुर से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। उन्होंने एक कार किराये पर ली थी और पशुपतिनाथ मंदिर, मनोकामना मंदिर तथा अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा की योजना बनाई थी। 26 अगस्त को पूर्वाह्न करीब 9:30 से 10 बजे के बीच वे धादिंग जिले के मलेखु कस्बे के एक होटल में चाय पीने के लिए रुके।


सेन ने बताया, वहां हमें पता चला कि आगे एक पुल बाढ़ में बह गया है। होटल एक भारतीय व्यक्ति का था, जिसने हमारी काफी मदद की और हमें भोजन भी उपलब्ध कराया। इसके बाद ये दोस्त वहां सामने आ रही भयावह आपदा के प्रत्यक्षदर्शी बन गए।

सेन ने कहा, हमने देखा कि कारें त्रिशूली नदी में बह रही थीं। पानी के तेज बहाव में शव और कई अन्य चीजें भी बहकर जा रही थीं। हम डर गए थे। हर समय यह आशंका बनी हुई थी कि बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है। समूह ने मलेखू में एक ऊंची जगह पर शरण ली और रात अपनी कार में बिताई।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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