11 वर्षीय पीहू पर सवार होंगी देवी काछन

जगदलपुर, 10 अक्टूबर 2026/ ऐतिहासिक एवं विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के निर्विघ्न और सफल आयोजन की औपचारिक अनुमति लेने की पारंपरिक रस्म ‘काछनगादी’ को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा के अनुसार बस्तर राज परिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव दल बल के साथ शनिवार को काछन गुड़ी पहुंचेगे और बेल के काँटो से बने झूले में सवार रण की देवी काछन से पर्व के निर्विघ्न संपादन की अनुमति मांगेंगे।

इस अलौकिक अनुष्ठान का सबसे मुख्य आकर्षण बेल के कांटों से तैयार किया जाने वाला विशेष झूला होता है, जिसे बनाने का जिम्मा लामनी स्कूलपारा निवासी जगत राम नेताम के परिवार पर है। परिवार के सदस्य जयराम नेताम ने बताया कि उनकी 22 पीढ़ियां निष्ठापूर्वक इस पवित्र सेवा कार्य को निभाती आ रही हैं और तय परंपरा के अनुसार यह कांटों का झूला शनिवार को पूरी श्रद्धा के साथ काछन गुड़ी पहुंचा दिया जाएगा।

इस वर्ष आयोजित होने वाली रस्म में बैलाबाजार पारा निवासी लगभग 11 वर्षीय बालिका पीहू दास पर देवी काछन सवार होंगी। विद्या ज्योति स्कूल में कक्षा पांचवीं की छात्रा पीहू कांटेदार झूले पर बैठकर बस्तर दशहरा के सफल आयोजन का आशीर्वाद देंगी। इसके साथ ही विधान के अंतर्गत काछन देवी की बहन रैला देवी के स्वरूप में बालिका गुनगुन की भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।

काछनगादी की इस पावन रस्म के संपन्न होते ही बस्तर दशहरा के पारंपरिक कार्यक्रमों का विधिवत आगाज हो जाएगा, जिसके साक्षी बनने के लिए समूचे बस्तर अंचल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु काछन गुड़ी पहुंचेंगे।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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