बस्तर में पक्के आशियाने से बदली ताराबती की जिंदगी

जगदलपुर, 10 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना दूरदराज के ग्रामीणों के जीवन में सुरक्षा और स्थिरता की नई किरण बनकर उभरी है। जिले के विकासखंड तोकापाल अंतर्गत ग्राम पंचायत छापर भानपुरी-दो की निवासी ताराबती सोम के लिए यह योजना न केवल एक पक्का मकान लेकर आई, बल्कि वर्षों से झेली जा रही असुविधाओं और भय के अंत की शुरुआत भी साबित हुई है। अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाली ताराबती लंबे समय से अपने परिवार के साथ एक बेहद जर्जर और कच्चे आशियाने में रहने को विवश थीं। पुराने दिनों के संघर्ष को बयां करते हुए वे बताती हैं कि पहले उनका मकान पूरी तरह कच्चा था, जिसकी छत पर सीमेंट शीट या घास-फूस का अस्थाई सहारा भर था।

बारिश के दिनों में यह कच्चा ढांचा पूरी तरह लाचार हो जाता था और ढलानों से बहने वाला पानी सीधे घर के अंदर भर जाता था। उस वक्त स्थिति इतनी विकट हो जाती थी कि परिवार को रात-रात भर जागकर घर के सामान और स्वयं को बचाना पड़ता था। इसके अलावा कच्ची दीवारों व दरारों की वजह से घर में चूहे परेशान करते थे और अक्सर जहरीले सांप-बिच्छू भी भीतर घुस आते थे, जिसके चलते परिवार हमेशा किसी अनहोनी की आशंका के साए में जीता था।

इस कठिन दौर के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में ताराबती सोम के नाम से पक्के आवास की स्वीकृति मिली, जिसके लिए एक लाख 20 हजार की सहायता राशि तय की गई। योजना से मिली आर्थिक मदद और परिवार के साझे प्रयासों से अब एक मजबूत, सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान बनकर तैयार हो चुका है।

पक्के घर के निर्माण के बाद अब ताराबती और उनका पूरा परिवार सभी आवश्यक सुख-सुविधाओं के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिता रहा है। अब न तो उन्हें बारिश में पानी टपकने की चिंता सताती है और न ही सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का कोई डर रहता है।

अपने नए घर की दहलीज पर सुकून महसूस करते हुए ताराबती ने प्रधानमंत्री और शासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को एक सुरक्षित छत देकर जीवन को खुशहाल बना दिया है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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