जगदलपुर, 18 अक्टूबर 2026। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के अवसर पर लगे मीना बाजार में ‘रसियन जलपरी’ के नाम से किए जा रहे प्रचार ने मेले की पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिसर में महिलाओं को जलपरी के रूप में दर्शाने वाले बड़े-बड़े आकर्षक पोस्टर लगाए गए हैं।

वहीं टिकट काउंटर पर इस कथित आकर्षण को देखने के लिए ₹100 प्रति टिकट की कीमत प्रदर्शित की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ₹100 वसूलकर दर्शकों को दिखाया क्या जा रहा है?

क्या पोस्टरों में दिखाया गया आकर्षण वास्तव में कार्यक्रम का हिस्सा है या फिर दर्शकों, विशेषकर युवाओं को लुभाने के लिए प्रचार का सहारा लिया जा रहा है? बस्तर दशहरा कोई साधारण मनोरंजन मेला नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा ऐतिहासिक महापर्व है।

यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और परिवार पहुंचते हैं। ऐसे में आयोजकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। सवाल यह भी है कि ‘रसियन जलपरी’ नाम से प्रचारित कार्यक्रम की वास्तविकता क्या है?

क्या प्रचार सामग्री में किए गए दावों की जांच हुई है?

क्या संबंधित कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है ?

यदि प्रचार और वास्तविक प्रदर्शन में अंतर पाया जाता है, तो यह दर्शकों को गुमराह करने का गंभीर मामला हो सकता है। अब सवाल जिला प्रशासन, मेला प्रबंधन और संबंधित विभागों से है कि आखिर ऐसे आकर्षणों की निगरानी कौन कर रहा है ?

क्या टिकट खरीदने से पहले दर्शकों को कार्यक्रम की पूरी जानकारी दी जा रही है?प्रशासन को तत्काल जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि ₹ 100 के टिकट के पीछे आखिर क्या दिखाया जा रहा है और प्रचार के दावे कितने सही हैं?

बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस महापर्व में मनोरंजन के नाम पर किसी भी संभावित भ्रामक प्रचार को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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