अनुवेद’ ब्रांड की खरीदारी कर दिया थम्स-अप

जगदलपुर, 20 अक्टूबर 2026/ बस्तर की समृद्ध जनजातीय शिल्पकला और अनूठी सांस्कृतिक विरासत अब सात समंदर पार के सैलानियों को भी अपना मुरीद बना रही है। ‘आमचो बस्तर टूरिज्म’ पहल के तहत संचालित ‘बस्तर कला एवं हस्तशिल्प – बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन’ में आज एक विदेशी पर्यटक ने भ्रमण कर स्थानीय शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा का दीदार किया। भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमान ने बस्तर की विश्वप्रसिद्ध प्राचीन ढोकरा आर्ट (बेलमेटल), काष्ठ शिल्प, बांस कला और रॉट आयरन से सजी आकर्षक कृतियों का बेहद बारीकी से अवलोकन किया।

इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों में रची-बसी पारंपरिक कारीगरी को देखकर वे खासे प्रभावित हुए और उन्होंने इस कला की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए ‘थम्स-अप’ के साथ अपनी खुशी और संतुष्टि जाहिर की।कला की सुंदरता से प्रभावित होकर विदेशी पर्यटक ने न केवल स्थानीय शिल्पकला की बारीकियों को समझा, बल्कि बस्तर के हुनर को स्मृति-चिह्न के तौर पर साथ ले जाने के लिए अनुवेद ब्रांड के तहत तैयार बस्तर आर्ट उत्पादों की जमकर खरीदारी भी की।

उल्लेखनीय है कि बस्तर कला गुड़ी परिसर का विकास राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी शिल्पकारों के उत्कृष्ट उत्पादों को एक व्यवस्थित मंच और सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक सीधे शिल्पकारों से जुड़ पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण महिला कलाकारों को उनकी मेहनत का उचित और सीधा पारिश्रमिक मिल रहा है।

भ्रमण के समापन पर विदेशी मेहमान ने कला गुड़ी की टीम और स्व-सहायता समूह की दीदियों के साथ यादगार ग्रुप फोटो भी खिंचवाई, जिससे पूरा परिसर उत्साह और गर्व के माहौल से सराबोर रहा।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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