उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल; इंद्रावती नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा बढ़ाने की मांग उठाने का आग्रह

जगदलपुर ,20 अक्टूबर 2026, / विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक एवं पारंपरिक आयोजन मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन को लेकर जारी निमंत्रण पत्र में बस्तर संभाग के आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के नाम शामिल नहीं होने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी परंपराओं से जुड़े इतने महत्वपूर्ण आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

आदिवासी सांसदों-विधायकों के नाम नहीं होने पर उठे सवाल

निमंत्रण पत्र में नाम शामिल नहीं होने को लेकर कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर विधायक एवं विधानसभा उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, कोंटा विधायक कवासी लखमा, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कांकेर विधायक आसाराम नेताम, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी और अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के नामों का उल्लेख किया जा रहा है।

इसके साथ ही बस्तर संभाग के विभिन्न आदिवासी समाजों के प्रमुखों को आमंत्रित किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आयोजन की अतिथि सूची तैयार करने में किन लोगों से परामर्श लिया गया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा समाज प्रमुखों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए, इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।

राष्ट्रपति के सामने बस्तर के बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं रखने की मांग

मुरिया दरबार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर उठे सवालों के बीच इंद्रावती नदी में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को राष्ट्रपति के समक्ष रखने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।हालिया बाढ़ से बस्तर क्षेत्र के कई गांवों में मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। अनेक परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और किसानों की हजारों एकड़ फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मकानों के नुकसान का उचित आकलन, फसल क्षति का मुआवजा और किसानों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण विषय है।बाढ़ प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बाद उनके सामने घरों की मरम्मत, आजीविका और खेती-किसानी को दोबारा शुरू करने की चुनौती है। किसानों और मजदूरों को राहत एवं मुआवजे की प्रक्रिया में समय पर सहायता मिलने की आवश्यकता है।ऐसे में मुरिया दरबार में शामिल होने वाले बस्तर के जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे राष्ट्रपति के समक्ष क्षेत्र की बाढ़ आपदा, प्रभावित परिवारों की स्थिति और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से रखें, ताकि इन मुद्दों पर संबंधित स्तर पर आवश्यक पहल हो सके।

RBC 6-4 के तहत मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग

बाढ़ से प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि बढ़ाने की मांग भी उठाई जा रही है। प्रभावित परिवारों की जरूरतों को देखते हुए मकान क्षति, फसल नुकसान और पुनर्वास के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर विचार किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।जनप्रतिनिधियों से आग्रह है कि वे बस्तर के किसानों, मजदूरों और बाढ़ प्रभावित परिवारों की आवाज राष्ट्रपति तक पहुंचाएं। साथ ही राज्य सरकार से राहत राशि, फसल क्षति के आकलन और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग करें, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर सहायता मिल सके।

राष्ट्रपति के आगमन से क्षेत्रीय समस्याओं को उठाने की उम्मीद

बस्तर के लोगों को उम्मीद रहती है कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के क्षेत्रीय दौरे के दौरान आदिवासी समाज की समस्याओं, अधिकारों, आजीविका और विकास से जुड़े मुद्दों को उचित मंच मिल सकेगा।इसी संदर्भ में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों को पर्याप्त भागीदारी का अवसर नहीं मिलता है, तो क्या बस्तर की जमीनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने रखने का अवसर सीमित हो सकता है?

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और प्रशासन के साथ समन्वय से क्षेत्र की आवश्यकताओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

मुरिया दरबार की आयोजन व्यवस्था पर स्पष्टीकरण की मांग

मुरिया दरबार के आयोजन की जिम्मेदारी, निमंत्रण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और अतिथियों की सूची तैयार करने को लेकर भी स्पष्टता की मांग की जा रही है। परंपरागत रूप से बस्तर दशहरा समिति से जुड़े इस आयोजन में इस बार संस्कृति विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष सामने आना आवश्यक है ।

हालांकि, संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों को अलग से आमंत्रित किया गया है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए निमंत्रण पत्र में नामों की अनुपस्थिति को अंतिम रूप से आमंत्रण नहीं दिए जाने का प्रमाण मानने से पहले संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति का पक्ष जानना जरूरी है।

बस्तर की संस्कृति, परंपरा और जनभागीदारी का सवाल

बस्तर दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मुरिया दरबार इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां बस्तर की विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। ऐसे ऐतिहासिक आयोजन में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए।

साथ ही इंद्रावती नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याओं, किसानों की फसल क्षति और उचित मुआवजे की मांग को भी प्राथमिकता से उठाया जाना चाहिए, ताकि बस्तर की जनता की वास्तविक समस्याएं संबंधित स्तर तक पहुंच सकें।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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