
एंटी नक्सल ऑपरेशन का असर, नक्सलवाद को बड़ा झटका
गरियाबंद, 18 अगस्त 2025/ बस्तर के बाद अब गरियाबंद में नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है। यहां नक्सलियों के डिवीजनल कमांडर समेत कुल चार खूंखार नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। इन पर कुल 19 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी अमरेश मिश्रा का खुलासा
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गरियाबंद पुलिस को सूचना मिली थी कि गरियाबंद-धमतरी बॉर्डर पर नक्सलियों का ठिकाना है। इस पर पुलिस व सीआरपीएफ ने छापामार कार्रवाई की।
कार्रवाई में नक्सली भाग खड़े हुए, लेकिन पुलिस को ₹16.5 लाख नगद और 31 जिंदा कारतूस मिले।
बाद में मुखबिरों की मदद से चार नक्सलियों ने सरेंडर करने का निर्णय लिया।
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सरेंडर करने वाले नक्सली और उनके हथियार
दीपक मंडावी (डिवीजनल कमांडर) – एसएलआर रायफल के साथ सरेंडर।
रनिता – थ्री नॉट थ्री रायफल के साथ सरेंडर।
कैलाश – इनामी नक्सली।
सुजाता – इनामी नक्सली।
इन चारों के ऊपर कुल ₹19 लाख का इनाम घोषित था। सभी समर्पित नक्सलियों को सरकार की नीति के तहत ₹50-50 हजार रुपये का नगद प्रोत्साहन भी दिया गया।
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नई नक्सल पुनर्वास नीति का असर
आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा:
> “छत्तीसगढ़ सरकार की नई नक्सल पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब वे समाज की मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं।”
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नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन
आईजी मिश्रा ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन के भीतर नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नक्सली संगठन तेजी से सिकुड़ रहा है और कई माओवादी अब पुलिस के सामने सरेंडर करने की तैयारी में हैं।
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रिपोर्ट: ओम साहू
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