रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

बस्तर की कला परंपराओं का भव्य संगम

जगदलपुर की आर्ट गैलरी में सजी भित्ति चित्रों की अनूठी प्रदर्शनी


जगदलपुर, 28 मार्च 2026/ बस्तर की माटी की सोंधी महक और यहाँ की प्राचीन लोक कलाओं को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ जगदलपुर स्थित दलपत सागर के समीप ‘बस्तर आर्ट गैलरी’ में एक विशेष भित्ति चित्र प्रदर्शनी का भव्य आयोजन शुक्रवार को किया गया। जिला प्रशासन बस्तर के सौजन्य से आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में बस्तर की ‘जगार शैली’ और सरगुजा की ‘रजवार शैली’ के चित्रों ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव की उपस्थिति रही, जिन्होंने कलाकारों की कल्पनाशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की।


        प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विधायक श्री किरण सिंह देव ने प्रत्येक कृति की बारीकियों को गहराई से समझा और इन्हें बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का गौरव बताया। विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त करते हुए उन्होंने इस कला को ‘अद्भुत’ की संज्ञा दी और कहा कि पारंपरिक शैलियों को आधुनिक मंच प्रदान करना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने आयोजन समिति ‘बादल’ आसना और ‘संस्कार भारती’ के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। विधायक जी ने संस्था को भविष्य में भी कला संरक्षण के ऐसे कार्यों को निरंतर जारी रखने हेतु अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

     प्रदर्शनी के दौरान आम जनता और कला प्रेमियों का उत्साह भी देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में पहुँचे प्रबुद्धजनों और नागरिकों ने इन चित्रों को बस्तर और सरगुजा अंचल की लोकगाथाओं का जीवंत दस्तावेज बताया। दर्शकों का कहना था कि श्री राजेन्द्र राव राऊत और डॉ. शशिप्रिया उपाध्याय के मार्गदर्शन में तैयार हुए ये चित्र न केवल दीवारें सजा रहे हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती परंपराओं को भी पुनर्जीवित कर रहे हैं। शाम 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक गैलरी में कला के प्रति जो आकर्षण दिखा, वह इस बात का प्रमाण था कि स्थानीय समाज अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस कर रहा है।


     इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में ‘बादल’ (बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर) और संस्कार भारती के विशेषज्ञों का विशेष योगदान रहा। 25 फरवरी से आयोजित हुई कार्यशाला के 50 प्रशिक्षार्थियों की मेहनत को जब जनप्रतिनिधियों और आम जनता की इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, तो कलाकारों के चेहरे खिल उठे। यह प्रदर्शनी सही मायनों में बस्तर की माटी और कलाकारों के हुनर का एक सामूहिक उत्सव साबित हुई, जिसने पूरे प्रदेश को अपनी कलात्मक आभा से सराबोर कर दिया।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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