रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

ग्रामीणों ने कुमार जयदेव व कुमार विजित देव का किया भव्य स्वागत
सैकड़ो ग्रामीणों की उपस्थिति में चार दिनों तक भव्य प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन हुआ संपन्न
8 मई 2026, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के सीमावर्ती क्षेत्र आंकुला ग्राम के गिरला पंचायत कोटपाड़ में नवनिर्मित माता के मंदिर के भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव एवं कुमार विजित देव के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ. ।
मंदिर समिति के सदस्य तपन पानीग्राही ने बताया की चार दिनों तक प्राण् प्रत्तिष्ठा कार्यक्रम पूरे विधिविधान से सैकड़ो ग्रामीणों की सहभागिता से आज संपन्न हुआ जिसमे सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव, उनके पुत्र कुमार विजित देव एवं गणमान्य नागरिकों सैकडों ग्रामवासियों के उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ ।

इससे पूर्व सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में खुले वाहन में कुमार जयदेव एवं कुमार विजय देव का ग्राम भ्रमण कराया गया । जहां ग्रामीणों ने अपने अपने घरों के सामने आकर्षक रंगोली सजाकर फूलों से उनका स्वागत सत्कार किया ।इस अवसर पर वर्तमान विधायक रूपु भतरा पूर्व विधायक पद्मिनी ध्यान एव चंद्रशेखर मांझी सहित गीता मांझी तपन पाणिग्रही एवं वृंदावन, मथुरा चंद्रमणि गोंडा ,राजू रंधारी सहित अनेक ग्रामवासी एवं सुकमा ,
दंतेवाड़ा मंदिर के सेवादार सहित बस्तर धाकड़ क्षत्रीय राजपूत समाज के बड़ी संख्या मे महिलाएं पुरुष उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि कुमार जयदेव ने कहा नव निर्मित माता के प्राण प्रतिष्ठा शुभारंभ अवसर पर पूजा अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ, लोगों ने जो सम्मान और स्नेह दिया उन्हें शब्दों मे पिरोना असंभव है । उन्होंने कहा मंदिर समिति हेतु यथासंभव सहयोग के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे।

विधायक रूुपु भतरा ने प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव एव विजित देव सहित उपस्थित समस्त जनों का स्वागत करते हुए कहा हम सब ठाकुरानी मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी और सहभागी बने हम सभी धन्य के भागीदार बने इससे और बढ़कर कुछ नही हो सकता । माता रानी की कृपा से सभी का कल्याण होगा ।
मंदिर समिति के राजू रंधारी ने मंदिर के संबंध में रोचक जानकारी देते हुए बताया कि 1950 -55 के दशक में राजस्व के एक आल्हा अधिकारी को चेचक के धब्बे निकल पड़े थे ।जिस पर वहां मंदिर के समक्ष उन्होंने माता को स्मरण करते हुए रोग के निदान की प्रार्थना पर दूसरे दिन पूरे शरीर से चकते के निशान गायब हो गये थे। तो उन्होंने गांव की 14 एकड़ भूमि मंदिर के नाम दर्ज कर दिया था ।जो आज वर्तमान मे भी है। जिनका उपयोग मंदिर के सदस्य करते है। इनसे दी गई जानकारी से यह साक्षात प्रमाण सिद्ध होता है, कि मंदिर प्राचीन कालीन सिद्ध पीठ है ।