रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

राष्ट्रीय संस्थानों की कार्यप्रणाली को समझा


जगदलपुर, 24 मई 2026/  वर्तमान शिक्षा पद्धति को अधिकाधिक व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी एवं विद्यार्थियों के मध्य उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने हेतु कृषि संकाय के विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया जाता है। इसी तारतम्य में कृषि महाविद्यालय जगदलपुर के अधिष्ठाता डॉ आरएस नेताम कुशल मार्गदर्शन में इस वर्ष विद्यार्थियों को उत्तर भारत में स्थित विभिन्न राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का भ्रमण कराया गया। डॉ. अश्विनी ठाकुर, सहसंचालक, जोनल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर एवं डॉ. एन. सी. मंडावी, प्रभारी शैक्षणिक शाखा के विशेष प्रयासों से महाविद्यालय में अध्ययनरत बी. एस. सी. कृषि तृतीय वर्ष के 90 छात्र-छात्राओं को पांच प्राध्यापकों के नेतृत्व में दिनांक 14 मई से 23 मई तक इस ज्ञानवर्धक भ्रमण पर भेजा गया था। इस 90 सदस्यीय टीम को 4 दलों में बांटकर सुव्यवस्थित ढंग से पूरा भ्रमण कराया गया, जिसका नेतृत्व भ्रमण प्रभारी डॉ. पीके सलाम, कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, डॉ. चेतना खांडेकर एवं सह-समन्वयक श्री संदीप ने किया, जबकि छात्र सौरभ के कुशल नेतृत्व एवं विद्यार्थियों के बीच बेहतरीन समन्वय से पूरा टूर अनुशासन एवं उत्कृष्टता की एक अनूठी मिसाल बन गया।


जगदलपुर से प्रारंभ होकर रायपुर, दिल्ली, करनाल, मनाली एवं देहरादून तक पहुंचे इस भ्रमण के रूट चार्ट के दौरान विद्यार्थियों को देश के शीर्ष संस्थानों को करीब से देखने का अवसर मिला। दिल्ली स्थित प्रमुख संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नेशनल प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेस और नेशनल जीन बैंक का विजिट कर छात्रों ने वहां की कार्यप्रणाली और एडवांस कृषि प्रणाली का विस्तारपूर्वक अवलोकन सह अध्ययन किया, जहां आईएआरआई के डॉ. मेहरा, डॉ. विनोद गुप्ता, अविनाश एवं एनबीपीजीआर से डॉ. संध्या ने बहुत ही आत्मीयतापूर्वक विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया। इसके पश्चात दूसरे दिन करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में छात्रों ने शुद्ध नस्ल के साहीवाल, थारपारकर, करन स्विस, करन फ्रिज गायों और मुर्राह भैंसों का अवलोकन किया तथा सेंटर प्रभारी डॉ. नितिन त्यागी से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हेतु उचित रखरखाव व प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

इसी कड़ी में एबीआरसी में डॉ. निशांत कुमार के गाइडेंस में दूध बढ़ाने हेतु चयनित सांडों से वीर्य संग्रहण एवं कृत्रिम गर्भाधान के महत्व को समझा गया, जहां सोमेटिक सेल से विकसित क्लोन भैंसे ‘श्रेष्ठ’, ‘तेजस’ एवं ‘करण’ सभी के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। इसके बाद करनाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ली रिसर्च का भ्रमण कर ब्रीडिंग, उत्पादन, प्रोसेसिंग एवं प्रबंधन का अवलोकन किया गया तथा इसके एटिक में डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से कृषि एवं संबंधित विभागों के कार्यों को और अधिक विस्तार से समझा गया।


इसके पश्चात टीम ने हिमाचल प्रदेश का रुख किया जहां कुल्लू स्थित कृषि विज्ञान केंद्र एवं हॉर्टिकल्चर संस्थानों का विजिट कर स्थानीय कृषि फसलों एवं उन्नत उत्पादन विधियों का व्यावहारिक अध्ययन किया गया। मणिकर्णिका में दर्शनोपरांत मनाली किसान भवन में प्रवास करते हुए छात्रों ने स्थानीय मंडी व बाजारों का अध्ययन किया और हिडिंबा मंदिर के दर्शन किए, साथ ही रोहतांग दर्रे से बर्फ से ढके पहाड़ों एवं वहां की नैसर्गिक सुंदरता का भी भरपूर आनंद लिया। हिमाचल प्रदेश के बाद यह दल उत्तराखंड पहुंचा, जहां देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च अकादमी एवं सेंट्रल एकेडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का विजिट कर प्रभारी श्री अमलेंदु पाठक जी से विशेष चर्चा की गई, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के इन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में पीजी एवं पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा करने हेतु गहराई से प्रेरित किया।


इस सफल शैक्षणिक भ्रमण के संबंध में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। छात्र दीपराज ने इसे सीखने और रोमांच का एक अद्भुत और अविस्मरणीय संगम बताते हुए इस सफर को अविश्वसनीय कहा, तो वहीं छात्र जमीरूल ने बताया कि इस भ्रमण ने उन्हें कक्षा से बाहर निकलकर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने और चीजों को वास्तविक जीवन में समझने का अनमोल अवसर दिया है जो उनके छात्र जीवन का हमेशा एक यादगार हिस्सा रहेगा। इसी तरह छात्रा रूपाली भारद्वाज ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सेमेस्टर प्रारंभ होने के बाद से ही सभी छात्र इस कोर्स के लिए जितने उत्साहित थे, हकीकत में उन्होंने उससे कहीं ज्यादा अच्छा और प्रेरणादायक अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विजिट कर वापस लौटने से छात्रों में उच्च शिक्षा के प्रति एक नया जोश और उत्साह का माहौल है। इस राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर अधिष्ठाता डॉ आरएस नेताम ने सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को हार्दिक बधाई दी है तथा सहयोग के लिए समस्त राष्ट्रीय संस्थानों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

Leave a Reply