विधानसभा में गरजे विधायक लखेश्वर बघेल, सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद से किए जा रहे खर्चों को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र के कई छात्रावास, आश्रम और स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन सरकार व्यायाम और जिम सामग्री पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।

विधायक ने सरकार से पूछा – प्राथमिकताएं क्या हैं?

विधायक बघेल ने सवाल उठाते हुए कहा,
“जब स्कूल भवन ही जर्जर हैं, तो व्यायाम सामग्री की खरीदी क्यों की जा रही है? सरकार करोड़ों रुपये की जिम सामग्री खरीद रही है। क्या यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए?”

इस पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब दिया कि शासी परिषद का अध्यक्ष कलेक्टर होता है, और विधायक स्वयं इसके सदस्य होते हैं। उन्होंने कहा, “परिषद की बैठक में जो प्रस्ताव पास हुए, उसी के तहत सामग्री की खरीदी हुई। यदि कोई शंका है तो जांच कराई जाएगी।”

बैठक हुई या नहीं, एसआईटी जांच हो – बघेल

विधायक बघेल ने मंत्री के जवाब पर असहमति जताते हुए कहा कि स्वशासी परिषद की बैठक आज तक हुई ही नहीं है। उन्होंने मांग की कि यदि बैठक हुई है तो उसका विवरण सार्वजनिक किया जाए और एसआईटी गठित कर जांच कराई जाए

सीएसआर और डीएमएफ फंड सिर्फ जगदलपुर और चित्रकोट में खर्च क्यों?

विधायक ने सदन में कहा कि सीएसआर और डीएमएफ फंड का उपयोग सिर्फ जगदलपुर और चित्रकोट विधानसभा में किया गया, जबकि अन्य क्षेत्रों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि क्या इन फंड्स के खर्च के लिए कोई भौगोलिक सीमा तय है?

मंत्री देवांगन का जवाब

मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि सीएसआर मद की राशि उन क्षेत्रों में खर्च की जाती है, जहां एनएमडीसी परियोजनाओं का प्रभाव है, और इनमें मुख्यतः चित्रकोट और जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं

बस्तर विधानसभा में सीएसआर फंड क्यों नहीं खर्च हुआ?

विधायक बघेल ने नगरनार स्टील प्लांट का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनके विधानसभा क्षेत्र से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन वहां सीएसआर मद से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। जबकि, अन्य इलाकों में 8-10 किलोमीटर दूर तक खर्च किया जा रहा है

विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणी

विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक बघेल की बात को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह सही मुद्दा है और भविष्य में इस पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने विधायक के प्रस्ताव को मंजूरी देने की बात कही

अब सवाल यह उठता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं? क्या वास्तव में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से ज्यादा जरूरी जिम सामग्री की खरीदी है? और क्या नगरनार स्टील प्लांट से प्रभावित गांवों को भी उनका हक मिलेगा?

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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