जोहार छत्तीसगढ़ जय छत्तीसगढ़ महतारी #
“छत्तीसगढ़ बिहारगढ़ नहीं बनेगा – अस्मिता और संस्कृति के लिए सुलग रहा जनाक्रोश
रायपुर | छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अस्मिता और परंपराओं को बचाने के लिए प्रदेशभर में विरोध के स्वर बुलंद हो रहे हैं। बिहार दिवस मनाने, छठ घाट बनाए जाने और बाहरी प्रभाव के बढ़ते दबाव को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जनता का स्पष्ट कहना है कि छत्तीसगढ़ की पहचान को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
बिहार दिवस और छठ घाट पर विरोध, छत्तीसगढ़ की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं
छत्तीसगढ़ के स्थानीय लोगों का मानना है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने के लिए बिहार दिवस जैसे आयोजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, प्रदेशभर में छठ घाट बनाए जाने को लेकर भी विरोध देखा जा रहा है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की अपनी अलग संस्कृति, तीज-त्योहार और परंपराएं हैं, ऐसे में बाहरी राज्यों के त्योहारों को थोपना प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता के साथ अन्याय है।
छत्तीसगढ़ की बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
हाल ही में सामने आई घटनाओं में छत्तीसगढ़ की लड़कियों को बिहार और अन्य राज्यों में बेचने के गंभीर मामले सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर लोगों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। बिहार में 41 नाबालिग लड़कियों को नौकरी के नाम पर देह व्यापार में धकेला जा रहा था, जिन्हें पुलिस ने रेस्क्यू किया। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ की जनता और भी ज्यादा सतर्क हो गई है और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही कदम नहीं उठाए, तो जनता को खुद ही आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
बाहरी प्रभाव से छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर खतरा
विरोध कर रहे छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के लोगों का कहना है कि प्रदेश में बाहरी राज्यों के रीति-रिवाजों को जबरदस्ती बढ़ावा देने से छत्तीसगढ़ की भाषा, परंपरा और संस्कृति खतरे में पड़ रही है। स्थानीय लोगों को उनके हक से वंचित कर बाहरी लोगों को बढ़ावा देना राज्य की पहचान को मिटाने की साजिश जैसा है। “छत्तीसगढ़ किसी के बाप का नहीं, यह हमारी अस्मिता और स्वाभिमान की धरती है,”— यह नारा अब प्रदेशभर में गूंजने लगा है।
सरकार की चुप्पी पर जनता नाराज, जवाब मांगा जा रहा है
प्रदेश सरकार की निष्क्रियता को लेकर भी लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर क्यों छत्तीसगढ़ की अस्मिता और बेटियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। क्या प्रदेश सरकार बाहरी दबाव में काम कर रही है? यदि ऐसा है तो आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है।
‘जगव रे बागी बलिदानी मन’ – युवाओं का आंदोलन तेज, उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के युवाओं ने ‘जगव रे बागी बलिदानी मन’ के नारे के साथ आंदोलन तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष श्री अमित बघेल का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द से जल्द छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर आंदोलन होगा। कई जिलों में युवाओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बाहरी प्रभाव को इसी तरह बढ़ावा मिलता रहा, तो जनता खुद अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
क्या छत्तीसगढ़ अपनी पहचान बचा पाएगा?
इस पूरे मुद्दे ने प्रदेश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है – क्या छत्तीसगढ़ अपनी संस्कृति, भाषा और पहचान बचा पाएगा? क्या बाहरी प्रभाव को रोकने के लिए सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी? या फिर यह लड़ाई अब पूरी तरह जनता के कंधों पर आ गई है?
आने वाले दिनों में इस आंदोलन का क्या रूप होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन एक बात स्पष्ट है – छत्तीसगढ़ बिहारगढ़ नहीं बनेगा, और इसे बचाने के लिए जनता हर संभव प्रयास करेगी।