रिपोर्ट: ओम साहू

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल दलपत सागर एक बार फिर संकट के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, अज्ञात लोगों द्वारा सागर की जमीन पर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा है और भराई का कार्य खुलेआम चल रहा है। इससे दलपत सागर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन और शासन की मौन स्वीकृति के तहत हो रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में चुप्पी साधे बैठा है, जिससे उसकी भूमिका संदिग्ध हो गई है।

लोगों का सवाल है –

> “क्या प्रशासन को इस अवैध गतिविधि की जानकारी है? यदि हां, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

बढ़ता आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

समाजसेवी गौतम पानीग्राही और विजय वार्ड पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता आंदोलन के लिए मजबूर होगी।

> “दलपत सागर को बचाने के लिए हम सबको एकजुट होना होगा। यदि प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, तो जन आंदोलन होगा।” – गौतम पानीग्राही

दलपत सागर का महत्व

दलपत सागर न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और लोगों की आजीविका से भी जुड़ा है। यहां के जलस्त्रोत मछुआरों, किसानों और स्थानीय पर्यावरण के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाते हैं।

क्या करें आप?

स्थानीय प्रशासन से दलपत सागर की रक्षा की मांग करें।

सोशल मीडिया पर #SaveDalpatSagar हैशटैग के साथ जागरूकता फैलाएं।

अपने क्षेत्रीय प्रतिनिधियों से जवाब मांगें।

निष्कर्ष

दलपत सागर हमारा साझा विरासत है। इसे बचाना केवल सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब वक्त आ गया है कि हम मिलकर आवाज़ उठाएं और इस ऐतिहासिक जलस्रोत को अवैध कब्ज़े से मुक्त कराएं।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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