जगदलपुर, 13 जून 2025 | रिपोर्ट: ओम साहू
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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। मुण्डागांव ग्राम पंचायत के सचिव जोगेन्द्र पांडे को 93 लाख से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं और कर्म में लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है मामला?
मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल में आई एक ऑनलाइन शिकायत पर जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया। जांच में सामने आया कि:
15वें वित्त आयोग (ग्राम पंचायत मद) के तहत 93,46,952 रुपये का आहरण हुआ।
परंतु सिर्फ 60,77,417 रुपये का ही मूल्यांकन और व्हाउचर प्रस्तुत किए गए।
शेष ₹32,69,535 का कोई मूल्यांकन या दस्तावेज नहीं मिले।
इसके अलावा, ₹13.08 लाख की अन्य निधियों से 10 कार्य स्वीकृत हुए, जिनमें प्रगति नहीं दिखाई गई।
गुनपुर पंचायत में भी 7 कार्यों के लिए ₹7.40 लाख स्वीकृत हुए थे।
लगातार चेतावनी के बावजूद सचिव ने नहीं दिखाई गंभीरता!
साप्ताहिक बैठकों में कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए जाते रहे, लेकिन श्री पांडे ने कोई ठोस पहल नहीं की।
⚖️ अब क्या होगा?
श्री जोगेन्द्र पांडे को छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत बस्तर रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
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बस्तर में भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ यह बड़ी प्रशासनिक सख्ती है। क्या यह संदेश बाकी पंचायत कर्मियों तक पहुंचेगा?
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