रिपोर्ट –जय शंकर पांडे



जगदलपुर, 07 अप्रैल 2026/ चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जो न केवल शारीरिक बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवारों को तोड़ देती है। ऐसे कठिन समय में महारानी अस्पताल और आयुष्मान भारत योजना कई परिवारों के लिए एक मसीहा बनकर उभरी है। जगदलपुर के इस चिकित्सा केंद्र से ऐसी कई कहानियाँ सामने आ रही हैं, जहाँ आर्थिक तंगी से जूझ रहे मरीज अब नई उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

       किराना दुकान चलाने वाली अनीता महावर की कहानी साहस और संघर्ष की एक मिसाल है। चैथे चरण के कैंसर से जूझ रही अनीता ने अपने शुरुआती इलाज के लिए हैदराबाद का रुख किया था, जहाँ ऑपरेशन और अन्य प्रक्रियाओं में उनके जीवन की जमा-पूंजी के लगभग 20 से 25 लाख रुपये खर्च हो गए। इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद जब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब आयुष्मान कार्ड उनके लिए सहारा बनी।

     पिछले दो वर्षों से वे जगदलपुर में ही अपना इलाज करा रही हैं और उनका मानना है कि यहाँ मिल रही निःशुल्क दवाओं और डॉक्टरों के समर्पण ने उन्हें मानसिक रूप से और भी मजबूत बना दिया है। अब वे बीमारी के डर को पीछे छोड़कर एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपनी जीवन यात्रा को आगे बढ़ा रही हैं।

        इसी अस्पताल में उपचाराधीन एक ऑटो चालक की पत्नी गौरी मिश्रा के लिए भी यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। एक साधारण आय वाले परिवार के लिए निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाना लगभग असंभव था, लेकिन सरकारी अस्पताल की सुलभ सुविधाओं ने उन्हें इस जानलेवा बीमारी के विरुद्ध लड़ने का साहस प्रदान किया है। वहीं स्वयं महारानी अस्पताल में नर्सिंग मेट्रन के पद पर कार्यरत लक्ष्मी टांडिया भी ओवरी के कैंसर से लड़ रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का गहरा अनुभव रखने वाली लक्ष्मी बताती हैं कि उन्होंने भी करीब दो साल तक बाहर इलाज कराया, जहाँ लागत बहुत अधिक थी। अब पिछले डेढ़ महीने से आयुष्मान योजना के तहत उनका उपचार यहीं चल रहा है, जहाँ उन्हें बेहद महंगी दवाइयां भी बिना किसी शुल्क के प्राप्त हो रही हैं।

         लक्ष्मी टांडिया का मानना है कि आज के दौर में गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए आयुष्मान योजना एक बड़ी राहत है, जिससे अब लोगों को इलाज के लिए भटकने या बाहर जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। इन महिलाओं के अनुभवों से स्पष्ट है कि उक्त अस्पताल की बेहतर व्यवस्था और आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने आम आदमी के मन में यह विश्वास जगाया है कि संसाधनों की कमी किसी के इलाज में बाधा नहीं बनेगी। महारानी अस्पताल आज न केवल चिकित्सा सेवा का केंद्र है, बल्कि यहाँ आने वाले हर मरीज के लिए जीत और जीवटता का एक नया मंच बन चुका है।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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