रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

📍 कोहकपाल ,ब्लॉक बकावंड (बस्तर)
🟥 🔥 RTI में खेल! 18 पन्नों
का वादा, 12 पन्नों में निपटा मामला – क्या छुपा रहा है ग्राम सचिव?
⚡ मामले का सार – अधूरी जानकारी से उठे बड़े सवाल
कोहकपाल ग्राम के सचिव प्रहलाद चंद्राकर के द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में 18 पन्नों की जानकारी देने का उल्लेख किया गया, लेकिन वास्तविकता में आवेदक को केवल 12 पन्नों की जानकारी व्हाट्सएप में उपलब्ध कराई गई।
जब RTI का जवाब आवेदक के पास आया तो उसमें साफ साफ अक्षरों में लिखा था कि 36 रु. ग्राम पंचायत कोहकपाल में जमा करें।
जब आवेदक ग्राम पंचायत कोहकापाल पहुंचा तो , आवेदक की बात फोन पर सचिव से हुई तो उन्होंने कहा कि 36 रु.ग्राम पंचायत में जमा करने के बाद, आप बकावंड जनपद पंचायत ने आके 18 पन्ने का जानकारी 2 दिन के अंदर आप ले लीजिएगा। ये 8 जनवरी 2026 की बात है।
13 मार्च 2026 को व्हाट्सएप के माध्यम से 12 पन्ने की पीडीएफ सचिव के द्वारा आवेदक को भेजी गई। जब आवेदक ने 6 पन्ने की जानकारी मांगी तो सचिव–इतना ही है जानकारी, अगर आपको जानकारी चाहिए तो लो नहीं तो मत लो
इस विरोधाभास ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जानबूझकर महत्वपूर्ण दस्तावेज छुपाए गए हैं?
जब भी बकावंड जनपद में जानकारी लेने जाने से सचिव साहब तोल मोल के जवाब देते थे और कहते थे , 1-2 दिन में दस्तावेज आके ले लेना।
⚖️ RTI कानून का सीधा उल्लंघन?
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत:–
🔹 धारा 7(1): मांगी गई जानकारी पूर्ण रूप से और समय पर देना अनिवार्य है।
🔹 धारा 7(9): सूचना को अधूरा या भ्रामक देना कानून के खिलाफ है।
🔹 धारा 20: जानबूझकर जानकारी छुपाने पर अधिकारी पर ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
👉 इस मामले में 18 की जगह 12 पन्ने देना स्पष्ट रूप से अधूरी सूचना देने की श्रेणी में आता है।
🚨 संदेह के घेरे में ग्राम सचिव –
कोहकपाल ग्राम के सचिव (प्रहलाद चंद्राकर) पर अब यह आरोप लग रहा है कि:–
📄 महत्वपूर्ण दस्तावेज छुपाए गए
🧾 रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका
❗ जानबूझकर सूचना को अधूरा दिया गया।
वो भी व्हाट्सएप के द्वारा।
क्या इस प्रकार दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ पहले भी किया गया है।
👉 यह मामला अब सिर्फ RTI तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी उजागर कर रहा है।
30 मार्च 2026 को जिला पंचायत जगदलपुर में शिकायत आवेदन दिया गया है।
अब देखते हैं कि अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर कितने दिनों में और क्या कार्यवाही करेंगे ?

📢 आवेदक करेगा बड़ी कार्रवाई
⚖️ जरूरत पड़ने पर राज्य सूचना आयोग तक मामला ले जाया जाएगा।
📹 पूरे मामले को सार्वजनिक कर जनता के सामने सच लाने की तैयारी।
जनपद पंचायत बकावंड सीईओ साहब से सवाल –
क्या इसी तरह से आपके विभाग के कर्मचारी सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करते हैं?
इस तरह का मामला क्या पहले भी आपके पास आ चुका है?
“पंचायत इंस्पेक्टर पद बहुत ही जिम्मेदारी की पद होती है।
ग्राम पंचायतों में ऑडिट इन्हीं के द्वारा होता है।” और क्या ये ग्राम पंचायत की ऑडिट में क्या पारदर्शिता से काम होता होगा?
क्या बिल वाउचर की सत्यापन में पारदर्शिता के साथ काम इनके द्वारा होती होगी?
क्या ये शासन की योजनाओं को ग्राम पंचायतों के व्यक्तियों को बताते होंगे?
🔥 जनता में आक्रोश – पारदर्शिता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ग्राम स्तर पर ही इस तरह से जानकारी छुपाई जाएगी, तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजमी है।
👉 “18 पन्नों की जगह 12 पन्ने देना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक संकेत है कि कहीं न कहीं कुछ छुपाया जा रहा है।”
सचिव की चतुराई या लापरवाही? 👇
आवेदक के पास, 3 अप्रेल को डाक के माध्यम से पत्र आया, जिसमें साफ साफ अक्षरों में लिखा गया है कि जानकारी 12 पन्ने की है। 18 की नहीं,

तो फिर पहले ग्राम पंचायत कोहकपाल में 36 रु. क्यों जमा करवाए?
सचिव साहब को ये शिकायत के बाद कैसे याद आ रहा है?
इस पत्र में ग्राम सचिव प्रहलाद चंद्राकर जो की आज जनपद पंचायत बकावंड में पंचायत इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ है। और इस प्रकार की सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़खानी कर रहा है।
13 मार्च 2026, तारीख लिख के आवेदन में 1 अप्रैल 2026, को बकावंड जनपद के आवक जावक में जमा किया गया। ( जो कि आवेदक के जिला पंचायत जगदलपुर में शिकायत के 2 दिन के बाद)।
इस प्रकार की धोखाधड़ी के बाद भी जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।
👉 यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।
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संपादक –ऋषभ कुमार
मो.–6266449977