रिपोर्ट –जय शंकर पाण्डेय

14 अप्रैल 2026,रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में आगामी 16 जून से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र के साथ बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब पढ़ाई शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा में दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और भोजन मंत्र का पाठ अनिवार्य किया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अनुसार – यह पहल बच्चों को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने और उनके समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। हालांकि इस निर्णय को लेकर कुछ स्थानों पर सवाल भी उठने लगे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

स्कूलों को जारी होंगे दिशा-निर्देश:


शिक्षा विभाग द्वारा सभी स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि नई व्यवस्था का सही तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सके। 16 जून से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी।

पाठ्यक्रम और गतिविधियों में व्यापक बदलाव:


शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने हाल ही में कहा था कि स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत अब मंत्रोच्चार के साथ होगी। साथ ही प्रतिदिन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के माध्यम से भी विद्यार्थियों को देशभक्ति और संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।

⭕शनिवार बनेगा एक्टिविटी डे:


नई व्यवस्था के तहत अब शनिवार को बैगलेस डे के बजाय “एक्टिविटी डे” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन बच्चों को लोकल खेल, योग, गार्डनिंग और हाउसकीपिंग जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा, जिससे उनका व्यावहारिक ज्ञान और सहभागिता बढ़े।

⭕स्कूलों में मंत्रों का वातावरण:


स्कूलों की दीवारों पर मंत्र लिखे जाएंगे, ताकि बच्चों को दिनभर उनका स्मरण हो सके। साथ ही लाउडस्पीकर के माध्यम से मंत्रोच्चार कराने की भी योजना है, जिससे पूरे परिसर में सकारात्मक माहौल बनाया जा सके।

👉 इस पहल को शिक्षा के साथ संस्कार जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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