रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 29 जून 2026, / बस्तर का दूसरा सबसे बड़ा और विश्व प्रसिद्ध गोंचा महापर्व आज देवस्नान पूर्णिमा – चंदन जात्रा पूजा विधान के साथ विधिवत शुरू हो गया। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज द्वारा शताब्दियों पुरानी परंपरा के तहत यह आयोजन किया गया।

चंदन जात्रा की रस्म:– सुबह शुभ मुहूर्त में ग्राम आसना से भगवान शालिग्राम को लाकर श्रीजगन्नाथ मंदिर में स्थापित किया गया। इसके बाद इंद्रावती नदी के महादेव घाट से पवित्र जल लाकर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र के 22 विग्रहों को पंचामृत, चंदन और पवित्र जल से अभिषेक कराया गया।

15 दिन दर्शन वर्जित – अनसर काल: मान्यता है कि चंदन के ठंडे तासीर के कारण भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी को ‘अनसर काल’ कहा जाता है। आज से 15 दिनों तक भगवान के दर्शन वर्जित रहेंगे। इस दौरान उन्हें जड़ी-बूटी का काढ़ा भोग लगाया जाता है।

आगे के कार्यक्रम:
1. 15 जुलाई – नेत्रोत्सव: भगवान स्वस्थ होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
2. 16 जुलाई – श्री गोंचा रथयात्रा: तीन रथों में सवार होकर भगवान जनकपुरी – सिरहासार भवन जाएंगे।
3. 24 जुलाई – बाहुड़ा गोंचा: वापसी की रथयात्रा होगी।

618 साल पुरानी परंपरा: बस्तर में गोंचा पर्व रियासत काल से मनाया जा रहा है। मान्यता है कि बस्तर के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव को पुरी के महाराजा ने रथपति की उपाधि दी थी। यहां जगन्नाथ मंदिर में 22 प्रतिमाओं की एक साथ रथयात्रा होती है, जो भारत में कहीं और नहीं होती।

हेरा पंचमी: – आषाढ़ शुक्ल पंचमी को ‘हेरा पंचमी’ उत्सव मनाया जाएगा। कथा के अनुसार माता लक्ष्मी भगवान को ढूंढने जनकपुरी पहुंचती हैं।