रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 18 सितम्बर 2026/ कच्ची झोपड़ी, टपकती छत और बरसात में कीचड़ से सना फर्श यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि बस्तर जिले के जनपद पंचायत जगदलपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरंदी की 45 वर्षीय खिरमनी की दो दशक लंबी कठोर हकीकत थी। लगभग 20 वर्ष पूर्व पति द्वारा अलग कर दिए जाने के बाद उन्होंने कभी हौसला नहीं हारा और मजदूरी कर अपनी इकलौती बेटी का पालन-पोषण करती रहीं। वर्षों के संघर्ष और मौसम की मार झेलने के बाद, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।
पंचायत के जरिए जब खिरमनी को योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने दो कमरों वाले मकान की पात्रता सूची के तहत आवेदन जमा किया। वर्ष 2024-25 में उनके आवेदन को स्वीकृति मिली, जिसके बाद कुल एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि तीन किस्तों क्रमशः 40 हजार, 60 हजार और 20 हजार रुपये के रूप में उनके खाते में अंतरित की गई।
लगभग एक लाख 45 हजार रुपये की कुल लागत से बने इस घर को पूरा करने के लिए खिरमनी ने अतिरिक्त राशि की कमी को अपने श्रमदान से दूर किया। उन्होंने खुद अपने घर के निर्माण कार्य में मजदूरी की, जिससे उन्हें मनरेगा के तहत 90 दिनों के रोजगार का भुगतान प्राप्त हुआ। निर्माण के दौरान जनपद स्तर के तकनीकी सहायक, विकासखंड समन्वयक और ग्राम पंचायत सचिव के निरंतर मार्गदर्शन तथा न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराई गई निर्माण सामग्री के कारण बिना किसी अड़चन के 27 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में दो कमरों व रसोईयुक्त एक सुंदर पक्का मकान बनकर तैयार हो गया।
कच्चे आशियाने के दर्द से निकलकर सुरक्षित पक्की छत पाने वाली खिरमनी अब धूप और बारिश की चिंताओं से पूरी तरह मुक्त हैं। अपनी खुशी जाहिर करते हुए वे कहती हैं कि इस पक्के मकान ने उन्हें केवल सुरक्षित आसरा ही नहीं दिया, बल्कि समाज में स्वाभिमान से जीने का एक मजबूत हौसला भी सौंपा है, जिसके लिए वे शासन-प्रशासन के प्रति हृदय से आभारी हैं।